उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बने राम मंदिर से 5 करोड़ रुपये की सोने की रामचरितमानस गायब होने की खबर आई थी। यह आरोप देश के पूर्व आईएएस अधिकारी और केंद्र सरकार में गृह सचिव रहे एस. लक्ष्मी नारायण ने लगाया था। उन्होंने कहा था कि उनकी दान की हुई सोने की रामचरितमानस मंदिर में नहीं मिल रही है। इस बात पर बड़ा विवाद शुरू हो गया। इसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने तुरंत सामने आकर इन आरोपों को गलत बताया। ट्रस्ट ने इस सोने की रामचरितमानस की एक नई फोटो शेयर की और कहा कि यह मंदिर में पूरी तरह सुरक्षित है।

 

एस. लक्ष्मी नारायण ने एक टीवी इंटरव्यू में बताया कि उनकी स्वर्गवासी माता जी की आखिरी इच्छा थी कि उनके गहनों को पिघलाकर सोने की एक रामचरितमानस बनाई जाए। उस किताब को रामलला को दान करना था। अपनी मां का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई लगा दी। उन्होंने करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से स्वर्ण पत्रों यानी सोने के पन्नों वाली यह खास किताब तैयार करवाई। इस सोने की रामचरितमानस का वजन लगभग 800 ग्राम है।  

 

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वह 8 अप्रैल 2024 को रामनवमी से ठीक पहले अयोध्या पहुंचे। उन्होंने यह सोने की रामचरितमानस राम मंदिर के लोगों को सौंप दी। शुरुआत में मंदिर में इसे रखकर इसकी लगातार पूजा की गई।  तीन-चार महीने बाद उन्हें जानकारी मिली कि वहां वह सोने की रामचरितमानस नहीं रखी है। इसके बाद उन्होंने सच जानने के लिए कई बार फोन किया, 10-12 चिट्ठियां लिखीं और व्हाट्सएप पर मैसेज भी भेजे लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।  

चंपत राय के व्यवहार पर उठाए सवाल

पूर्व आईएएस अधिकारी ने बताया कि वह इस बारे में बात करने के लिए खुद अयोध्या भी गए और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मिलने की कोशिश की। वहां उन्हें चंपत राय से मिलने के लिए बाहर करीब 9 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। जब मुलाकात हुई तो चंपत राय का व्यवहार बहुत खराब था।  चंपत राय ने उनसे  से कहा, 'मेरे पास बहुत सारा सोना-चांदी आता है, क्या मैं सबको दिखाता फिरूं?' एस. लक्ष्मी नारायण ने उनसे बार-बार विनती की कि यह उनके जीवन भर की कमाई है, इसे किसी अच्छी जगह पर लोगों को देखने के लिए रख दिया जाए। उनकी बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया। इस खराब व्यवहार और अपमान की वजह से उन्हें मजबूरी में यह बात सबके सामने लानी पड़ी।  

राम मंदिर ट्रस्ट ने क्या सफाई दी?

जब यह विवाद बहुत ज्यादा बढ़ गया तो रविवार को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बयान जारी किया। ट्रस्ट ने कहा कि पूर्व आईएएस अधिकारी के सारे आरोप गलत हैं। लोगों के मन का शक दूर करने के लिए ट्रस्ट ने उस सोने की रामचरितमानस की एक नई फोटो शेयर की।  

 

ट्रस्ट की तरफ से बताया गया कि यह सोने की रामचरितमानस शुरुआत में कुछ दिनों तक मंदिर के गर्भगृह यानी जहां रामलला बैठते हैं उनके पास ही रखी थी। बाद में सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए इसे मंदिर परिसर के अंदर ही बने सुरक्षित स्टोर रूम में संभालकर रख दिया गया है। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि पूर्व आईएएस अधिकारी जब भी चाहें यहां आकर अपनी इस दान की हुई किताब को खुद देख सकते हैं। 

मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि का दिया उदाहरण

अपनी बात को सही साबित करने के लिए एस. लक्ष्मी नारायण ने मथुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि एक कीमती सोने की भगवद्गीता मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को भी दान की थी। उस गीता के सभी 18 अध्यायों के लगभग 18,000 श्लोक स्वर्ण पत्रों पर लिखे गए थे।  

 

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वहां श्रीकृष्ण जन्मभूमि के सचिव कपिल शर्मा ने उस भेंट को पूरे नियम के साथ लिया था और उसकी रसीद भी दी थी। वह आज भी मथुरा के मंदिर परिसर में पूरी तरह सुरक्षित है और वहां उसकी रोज नियम से पूजा-आरती होती है। एस. लक्ष्मी नारायण ने खुशी जताते हुए कहा कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी वहां जाकर उसकी पूजा-अर्चना की थी। पूर्व आईएएस ने कहा कि मथुरा में उन्हें बहुत सम्मान मिला और उनकी मां की इच्छा पूरी हुई लेकिन अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट से उन्हें सिर्फ निराशा मिली।