उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में आहत होकर इस्तीफा देने वाले जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार के सगे भाई विश्वजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्होंने इस्तीफा सीएम के प्रति सम्मान में नहीं दिया है, बल्कि फर्जीवाड़े में पकड़े जाने के डर से दिया है। उन्होने आरोप लगाए हैं कि फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाकर उन्होंने नौकरी ली, अब जांच के दायरे में हैं तो निलंबन से बचने के लिए इस्तीफे की पेशकश कर दी। विश्वजीत सिंह ने यह भी कहा है कि जांच आखिरी दौर में है। 

प्रशांत कुमार के भाई विश्वजीत कुमार ने दावा किया है कि जांच और रिकवरी से बचने के लिए वह अपने पद से इस्तीफा देकर भाग रहे हैं। विश्वजीत कुमार ने दावा किया है कि उन्होंने आंख की ऐसी बीमारी बताई है, जो 50 साल से कम उम्र के व्यक्ति को पूरी दुनिया में कहीं नहीं होती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि जन्मतिथि में भी उनके भाई ने धोखाधड़ी की है। 

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प्रशांत कुमार सिंह के भाई ने क्या आरोप लगाए हैं?

प्रशांत कुमार सिंह के भाई ने दावा किया है कि उन्होंने खुद को 40 फीसदी नेत्रहीन बताया है, फर्जी दिव्यांगता का सर्टिफिकेट बनवाया है। प्रशांत कुमार ने फर्जीवाड़ा करके यह नौकरी हासिल की। उन्होंने अपील की है कि योगी आदित्यनाथ दोबारा इसकी जांच कराएं। 

प्रशांत किशोर के भाई ने यह भी बताया है कि वह दो बार मेडिकल बोर्ड के सामने हाजिर नहीं हुए हैं। चीफ मेडिकल ऑफिस, मऊ ने एक जांच भी शुरू की है। विश्वजीत सिंह ने खुद अपने भाई के खिलाफ फर्जी विकलांग सर्टिफिकेट से नौकरी पाने की शिकायत दी है। केस की छानबीन के लिए एक जांच बैठाई गई है। प्रशांत कुमार से अब पूछताछ होगी। 

 

 

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मामला क्या है?

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जीएसटी विभाग के उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से व्यथित होकर यह कदम उठाने का दावा किया। उन्होने बताया है कि वहसरकार, सीएम और पीएम के समर्थन में और शंकराचार्य के विरोध में इस्तीफा दे रहे हैं।
 

प्रशांत कुमार सिंह ने इस्तीफा सीधे राज्यपाल को भेजा और नैतिक जिम्मेदारी का हवाला दिया है। उनके इस्तीफे से एक दिन पहले बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। वह नए यूजीसी नियमों और शंकराचार्य से जुड़े विवाद से असहमत थे। अभी तक राज्यपाल कार्यालय से इस्तीफे की स्वीकृति पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।