logo

ट्रेंडिंग:

'वह अकबर है, औरंगजेब है', CM योगी के लिए ऐसा क्यों बोले अविमुक्तेश्वरानंद?

प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिए हुए विवाद के बाद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

news image

अविमुक्तेश्वरानंद । Photo Credit: PTI

शेयर करें

संबंधित खबरें

Reporter

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में हुए बवाल के बाद अब उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बोला है। योगी आदित्यनाथ की आलोचना करते हुए उन्होंने उनको औरंगजेब बताया।

 

उन्होंने कहा,  'यही योगी जिसे आप लोग साधु संत कहते हो वह हिंदू कहने के लायक नहीं है। जिसको आप लोग साधु संत कहते हो उसे हम हुमायूं का बेटा अकबर कहते हैं, औरंगजेब कहते हैं। यह नहीं है हिंदू कहने के लायक। यह हिंदू मंदिर को तोड़ने का समर्थन करने वाला है।

 

यह भी पढ़ें: कभी लाठी पड़ी, अब शिष्य पिटे, विवादों में क्यों रहते हैं अविमुक्तेश्वरानंद?

 

वाराणसी में कथित तौर पर तोड़े गए मंदिरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 150 से ज्यादा मंदिर तोड़ दिए गए और उनके मुंह से एक शब्द तक नहीं निकला ताकि उनकी गद्दी नहीं चली जाए। मुख्यमंत्री की गद्दी को पौराणिक मूर्तियों के सामने महत्त्वपूर्ण समझने वाला सत्ता लोलुप है हिंदू नहीं है।

क्या था विवाद?

मौनी अमावस्या के दिन अविमुक्तेश्वरानंद ने करीब अपने 200 शिष्यों के साथ प्रयागराज के संगम में स्नान करने की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस ने अनुमति न होने और अव्यवस्था फैलने का हवाला देकर उन्हें रोक दिया। कथित रूप से उनके शिष्यों से पुलिस ने मारपीट भी की, जिसके बाद मामले में विवाद खड़ा हो गया था।

 

 

अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया था कि जानबूझकर पुलिस ने पीटा है, उन्हें उठाया गया है। उन्होंने कहा था कि उनकी आंखों के सामने शिष्यों को चुन-चुनकर मारा गया। उन्होंने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया था। 

प्राधिकरण ने भेजा नोटिस

इस घटना के बाद प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस भेजकर पूछा है कि वह किस आधार पर खुद को शंकराचार्य बताते हैं। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में एक लंबित मामले का जिक्र किया गया है और कहा है कि वह शंकराचार्य कैसे हैं।

 

यह भी पढ़ें: मौनी अमावस्या पर भूल कर न करें ये गलतियां, खत्म हो जाएगा व्रत का महत्व

 

दरअसल साल 2022 में उनका पट्टाभिषेक विवादास्पद था। जब स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की मृत्यु के बाद अविमुक्तेश्वरानंदर ने उनका उत्तराधिकारी होने का दावा किया और कहा कि उन्हें ही उनके गुरु उत्तराधिकारी बनाकर गए हैं। उनके पट्टाभिषेक पर गोवर्धन मठ और पुरी पीठ ने मान्यता नहीं दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के रूप में अभिषेक पर रोक रहेगी।


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap