ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में हुए बवाल के बाद अब उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बोला है। योगी आदित्यनाथ की आलोचना करते हुए उन्होंने उनको औरंगजेब बताया।
उन्होंने कहा, 'यही योगी जिसे आप लोग साधु संत कहते हो वह हिंदू कहने के लायक नहीं है। जिसको आप लोग साधु संत कहते हो उसे हम हुमायूं का बेटा अकबर कहते हैं, औरंगजेब कहते हैं। यह नहीं है हिंदू कहने के लायक। यह हिंदू मंदिर को तोड़ने का समर्थन करने वाला है।
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वाराणसी में कथित तौर पर तोड़े गए मंदिरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 150 से ज्यादा मंदिर तोड़ दिए गए और उनके मुंह से एक शब्द तक नहीं निकला ताकि उनकी गद्दी नहीं चली जाए। मुख्यमंत्री की गद्दी को पौराणिक मूर्तियों के सामने महत्त्वपूर्ण समझने वाला सत्ता लोलुप है हिंदू नहीं है।
क्या था विवाद?
मौनी अमावस्या के दिन अविमुक्तेश्वरानंद ने करीब अपने 200 शिष्यों के साथ प्रयागराज के संगम में स्नान करने की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस ने अनुमति न होने और अव्यवस्था फैलने का हवाला देकर उन्हें रोक दिया। कथित रूप से उनके शिष्यों से पुलिस ने मारपीट भी की, जिसके बाद मामले में विवाद खड़ा हो गया था।
अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया था कि जानबूझकर पुलिस ने पीटा है, उन्हें उठाया गया है। उन्होंने कहा था कि उनकी आंखों के सामने शिष्यों को चुन-चुनकर मारा गया। उन्होंने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया था।
प्राधिकरण ने भेजा नोटिस
इस घटना के बाद प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस भेजकर पूछा है कि वह किस आधार पर खुद को शंकराचार्य बताते हैं। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में एक लंबित मामले का जिक्र किया गया है और कहा है कि वह शंकराचार्य कैसे हैं।
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दरअसल साल 2022 में उनका पट्टाभिषेक विवादास्पद था। जब स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की मृत्यु के बाद अविमुक्तेश्वरानंदर ने उनका उत्तराधिकारी होने का दावा किया और कहा कि उन्हें ही उनके गुरु उत्तराधिकारी बनाकर गए हैं। उनके पट्टाभिषेक पर गोवर्धन मठ और पुरी पीठ ने मान्यता नहीं दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के रूप में अभिषेक पर रोक रहेगी।