हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है लेकिन माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन 'मौन' यानी चुप रहने का सबसे बड़ा महत्व होता है, इसलिए इसका नाम मौनी अमावस्या पड़ा। यह पर्व आत्मशुद्धि, पितरों की शांति और पुण्य कमाने का अनमोल अवसर प्रदान करता है। लाखों श्रद्धालु इस दिन प्रयागराज के संगम में गंगा स्नान करते हैं क्योंकि मान्यता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत के समान हो जाता है।
मौनी अमावस्या माघ महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। इस दिन मौन व्रत रखने, पवित्र नदियों (खासकर गंगा) में स्नान करने, दान देने और पितरों का तर्पण करने से बहुत पुण्य मिलता है।
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मौनी अमावस्या और इसका महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किए गए कामों का फल हजारों गुना बढ़ जाता है। मौन रहने से मन की चंचलता शांत होती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और आत्मिक शक्ति बढ़ती है। साथ ही पितृदोष दूर होता है। पूर्वजों की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
तिथि और संयोग
18 जनवरी 2026 रविवार को मौनी अमावस्या मनाया जा रहा है। 17 जनवरी की रात लगभग 12:03 बजे से इसकी शुरूआत होगी और 19 जनवरी रात लगभग 1:21 बजे इसका समापन हो जाएगा। इस बार सर्वार्थसिद्धि योग, शिव वास योग जैसे शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन के कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त (सबसे उत्तम स्नान-ध्यान): सुबह 4:30 से 5:30 बजे तक
- स्नान-दान का मुख्य समय: ब्रह्म मुहूर्त से सूर्योदय तक (लगभग सुबह 5:30 से 7:15 बजे तक)
- अभिजीत मुहूर्त (खासकर पूजा-दान): दोपहर 12:00 से 1:00 बजे के आसपास
- पितर तर्पण/श्राद्ध/पिंडदान: सुबह 11:00 से दोपहर 2:30 बजे तक
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मनाने की विधि और नियम
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें (गंगाजल मिलाकर भी घर पर स्नान कर सकते हैं)।
- दिन भर (या कम से कम कुछ घंटे) चुप रहें, अनावश्यक बातें न करें।
- सूर्य को अर्घ्य दें, भगवान विष्णु-शिव की पूजा करें।
- काले तिल, जल, कुश से पितरों का तर्पण करें।
- कंबल, जूते, अनाज, तिल, कपड़े, भोजन, गाय को खाना आदि का दान करें।
- गरीबों, ब्राह्मणों, जानवरों को दाना-पानी दें।
- शाकाहारी भोजन करें या फलाहार रखें।
नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।