इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में पिछले महीने गंदे पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई थी। अब राज्य सरकार ने इस मामले की गहराई से जांच कराई है। इस जांच में पता चला है कि कुल 21 मौतों में से 15 मौतें सीधे तौर पर सीवेज (गंदे नाले) से मिले दूषित पानी पीने की वजह से हुईं।

 

इंदौर के डिवीजनल कमिश्नर सुदाम खाड़े ने बताया कि ये 15 मौतें दस्त (डायरिया) और इससे जुड़े लक्षणों की वजह से हुईं, जो दूषित पानी से फैला। बाकी दो मामलों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। चार मौतें दूसरी वजहों से हुईं जैसे किडनी फेलियर और दिल का दौरा।

 

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उल्टी दस्त की हुई थी शिकायत

यह जांच इंदौर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज (MGM) के डॉक्टरों ने की थी। रिपोर्ट मंगलवार को राज्य सरकार को सौंपी गई। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, 'डॉक्टरों से सिर्फ इतना पूछा गया था कि कितनी मौतें दूषित पीने के पानी की वजह से हुईं।'

 

इस घटना की शुरुआत 29 दिसंबर को हुई जब इलाके में तीन लोगों की मौत उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद हो गई। 3 जनवरी को पानी के सैंपल टेस्ट में पाया गया कि नल का पानी खतरनाक बैक्टीरिया से भरा हुआ था। इसमें ई. कोलाई, साल्मोनेला, विब्रियो कॉलेरा जैसे बैक्टीरिया के साथ-साथ वायरस, फंगस और प्रोटोजोआ भी थे। इससे लोगों में पॉलीमाइक्रोबियल इंफेक्शन, मल्टी-ऑर्गन फेलियर और सेप्सिस हो गया।

39 मरीज अभी भी भर्ती

मंगलवार को मौत का आंकड़ा बढ़कर 22 हो गया, जब बॉम्बे हॉस्पिटल में इलाज हो रहे एक महिला की मौत हो गई। अभी भी 39 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 10 की हालत गंभीर है और वे आईसीयू में हैं।

 

सरकार ने 18 परिवारों को मानवीय आधार पर 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है। हालांकि जिला प्रशासन पहले कह रहा था कि सिर्फ 10 मौतें ही दूषित पानी से जुड़ी हैं।

कई शवों का पोस्ट मॉर्टम नहीं

चूंकि कई शवों का पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ था और परिवार व प्रशासन के बयान अलग-अलग थे, इसलिए डॉक्टरों ने सिर्फ मेडिकल रिकॉर्ड, इलाज के कागजात और लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष निकाला।

 

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ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की टीम ने भी इस घटना पर अपनी रिपोर्ट भोपाल में नेशनल हेल्थ मिशन को सौंपी है, लेकिन रिपोर्ट के अंदर की बातें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं।