हरियाणा सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर सभी विभागों से कुछ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल ना करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में हरियाणा के मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से मंगलवार को एक लेटर जारी किया गया है, जिसमें इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। सरकार की और से जारी नोटिस में विभागों से कहा गया है कि किसी भी सरकारी कामकाज में और डॉक्यूमेंट्स में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए हरिजन और गिरिजन जैसे शब्दों का प्रयोग न किया जाए।
सरकार ने इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि भारत के संविधान में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए इन शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया है। इसलिए सभी आधिकारिक कामों में केवल संविधान में बताए गए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति शब्दों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
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सरकार को मिली थी शिकायतें
हरियाणा में हरिजन और गिरजन जैसे जातिसूचन शब्दों के इस्तेमाल पर पहले ही रोक है। हालांकि, सरकार के आदेश के बावजूद इन शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा था। हाल फिलहाल में ऐसी कई शिकायतें सामने आई थी जिसमें इन जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा था। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने इस संबंध में आपत्ति भी दर्ज करवाई थी, जिसके बाद अब सरकार ने यह सख्त निर्देश जारी किए हैं।
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सरकार के संज्ञान में आया है कि पहले से जारी निर्देशों के बावजूद कुछ विभागों में अभी भी हरिजन और गिरिजन शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार ने सभी विभागों को केंद्र सरकार के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने और सभी आधिकारिक मामलों में इन शब्दों का इस्तेमाल तुरंत बंद करने के लिए कहा गया है।
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किन्हें जारी किए निर्देश?
आधिकारिक नोटिस के अनुसार, हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों, निगमों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, उप-मंडल अधिकारियों के साथ साथ राज्य की सभी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रारों को भी यह निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने की बात भी कही गई है।
बता दें कि हरिजन शब्द राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अनुसूचित जातियों को सम्मान देने के लिए इस्तेमाल किया था। इसका अर्थ है हरि यानी भगवान और जन यानी लोग यानी भगवान के लोग या भगवान की संत्तान। हालांकि, इस शब्द को लेकर भीम राव अंबेडकर महात्मा गांधी से अलग राय रखते थे। बीआर अंबेडकर हरिजन के बजाय दलित शब्द का इस्तेमाल करना ज्यादा पसंद करते थे। भारतीय संविधान में भी हरिजन या गिरजन जैसे किसी भी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। केंद्र सरकार ने इन शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।
