संजय सिंह, पटना। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने तीन दिवसीय बिहार दौरे के बीच सीमांचल में कैंप किया। उन्होंने अवैध घुसपैठ और अतिक्रमण के मुद्दे पर बड़ा ऐलान भी किया। अररिया में आयोजित सशस्त्र सीमा बल (SSB) के कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि सीमा से 10 किलोमीटर के दायरे में जितने भी अवैध अतिक्रमण हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाएगा और अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। शाह ने आगे कहा कि हम आश्वस्त करते हैं कि एक-एक घुसपैठिये को बाहर निकालकर ही अगली बार वोट मांगने आएंगे। 

तीन दिन में बनेगी कार्ययोजना

अपने संबोधन में शाह ने कहा कि घुसपैठ देश के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है और अब समय आ गया है कि हर स्तर पर समन्वित कार्रवाई की जाए। उन्होंने जानकारी दी कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, बिहार के गृह विभाग, संबंधित जिलों के डीएम-एसपी और अन्य एजेंसियों के साथ विस्तृत बैठक की जाएगी। तीन दिन के भीतर एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके तहत सीमा क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाने और घुसपैठियों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।

 

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जनसंख्या संतुलन पर चिंता जताई

अमित शाह ने कहा कि किसी भी देश में जनसंख्या का असंतुलित बदलाव स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए उचित नहीं होता। अतिक्रमण और घुसपैठ के कारण जनसंख्यिकी में परिवर्तन देश की संस्कृति, इतिहास और भूगोल तीनों के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने ऐलान किया कि जनसंख्यिकी परिवर्तन की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह समिति केवल सीमांत क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे देश की स्थिति का आकलन कर आवश्यक सुझाव देगी।

बंगाल, बिहार और झारखंड अधिक प्रभावित

शाह ने बताया कि घुसपैठ से सबसे अधिक प्रभावित राज्य पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड हैं। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में आगामी चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर सीमा पर बाड़ लगाने का काम प्राथमिकता से होगा। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करना और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना हमारी प्रतिबद्धता है। घुसपैठियों को चिन्हित कर विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत देश से बाहर भेजा जाएगा।

सीमांचल पर विशेष फोकस

सीमांचल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि बिहार में सरकार बनने के समय वादा किया गया था कि इस इलाके से अवैध घुसपैठ की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार अपने वादे पर कायम है और चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सीमा सुरक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि सीमाओं की रक्षा में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है और सरकार उन्हें हर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगी। 

किशनगंज में आर्मी बेस पर तेजी के निर्देश

गृह मंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय सीमांचल दौरा महज राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को नए सिरे से मजबूत करने की ठोस पहल के रूप में सामने आया। बुधवार को किशनगंज जिला परिषद स्थित ‘मेची सभागार’ में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सीमा सुरक्षा, खुफिया तंत्र की मजबूती और प्रस्तावित सेना के बेस कैंपों पर विस्तार से मंथन हुआ। बैठक के बाद यह संकेत स्पष्ट हो गया कि केंद्र सरकार अब सीमांचल जैसे संवेदनशील इलाके में सुरक्षा परियोजनाओं में किसी भी तरह की देरी स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

 

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बैठक का सबसे अहम मुद्दा कोचाधामन, बहादुरगंज और नटुआपारा में प्रस्तावित सेना के बेस कैंप रहा। ये तीनों स्थान सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। लंबे समय से भूमि अधिग्रहण को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और प्रक्रियात्मक अड़चनें बनी हुई हैं। गृह मंत्री ने अधिकारियों से साफ शब्दों में कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं में विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि जिला प्रशासन ग्रामीणों के साथ सीधे संवाद स्थापित करे, उनकी शंकाओं का समाधान करे और मुआवजे की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए।

'चिकन नेक' पर सख्त पहरे की तैयारी

किशनगंज का इलाका सामरिक दृष्टि से इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह 'चिकन नेक' कहे जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब है। यह संकरा गलियारा पूर्वोत्तर भारत को देश के शेष हिस्सों से जोड़ता है। गृह मंत्री ने स्पष्ट कहा कि इस इलाके में खुफिया तंत्र को और सशक्त किया जाए। सीमा पार की हर गतिविधि की रियल-टाइम जानकारी मुख्यालय तक पहुंचे, इसके लिए आधुनिक ड्रोन सर्विलांस, तकनीकी निगरानी और संचार प्रणाली को और उन्नत करने पर सहमति बनी।