कांग्रेस पार्टी ने साल 2017 में पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन की एक दशक की सत्ता को हटाकर अपनी सरकार बनाई थी। सरकार की कमान कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह को दी गई। पार्टी ने उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था और बड़ी जीत हासिल की लेकिन सरकार बनने के कुछ समय बाद ही पार्टी में गुटबाजी शुरू हो गई। कुछ ही समय में सरकार के अंदर नवजोत सिंह सिद्धू बनाम कैप्टन अमरिंदर सिंह शुरू हो गया।
नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी ही सरकार पर आरोप लगाए कि उनकी सरकार ने बेअदबी, ड्रग्स और बिजली समझौतों जैसे मुद्दों पर काम नहीं किया। उनका कहना था कि सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर पाई है। 2019 जुलाई में उन्होंने पंजाब कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस पार्टी के बीच की गुटबाजी सार्वजनिक तौर पर सामने आ गई थी। कैप्टन बनाम सिद्धू की लड़ाई कैबिनेट में खत्म हो गई लेकिन पार्टी सिद्धू के प्रभाव को अलग नहीं कर सकती थी।
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सिद्धू की ताजपोशी से करारी हार तक
पंजाब कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी को खत्म करने के लिए पार्टी ने नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी का अध्यक्ष बना दिया और कैप्टन अमरिंदर सिंह सीएम बने रहे लेकिन यह रणनीति भी काम नहीं आई। कांग्रेस पार्टी के अंदर गुटबाजी लगातार बढ़ती गई। कांग्रेस पार्टी के विधायक दिल्ली और चंडीगढ़ के चक्कर लगाते रहे और आखिरकार सितंबर 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके कुछ ही दिनों बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया था जो कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा झटका था।
नवजोत सिंह सिद्धू और अमरिंदर सिंह की लड़ाई में पार्टी ने दलित समुदाय से आने वाले चरनजीत सिंह चन्नी को सीएम बना दिया। यह फैसला कांग्रेस को फायदा पहुंचाने के बजाय अंदरूनी गुटबाजी को और ज्यादा हवा दे गया था। कांग्रेस से अलग होने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब लोक कांग्रेस के नाम से एक अलग पार्टी बनाई और बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया।
2022 के बाद लगे झटके
कांग्रेस पार्टी 2022 में बुरी तरह चुनाव हार गई। आम आदमी पार्टी ने रिकॉर्ड सीटों के साथ राज्य में पहली बार सरकार बनाई। आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद कांग्रेस पार्टी में टूट शुरू हो गई। सबसे पहले तो पार्टी अधय्क्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने पार्टी के प्रधान पद से इस्तीफा दिया। इसके कुछ समय बाद वह धीरे-धीरे राज्य की राजनीति से गायब हो गए और उनकी पत्नी को भी पार्टी के खिलाफ बयानबाजी के चलते पार्टी से बाहर कर दिया गया।
कांग्रेस पार्टी ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ से सारे पद छिन लिए थे। इस अपमान से उनका दिल टूट गया था और उन्होंने कांग्रेस पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया था। इसके कुछ समय बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। इसके साथ ही फतेह जंग सिंह बाजवा ने भी कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था।
इन नेताओं ने भी छोड़ी पार्टी
2022 की करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी से एक के बाद एक नेता छिटकते गए। इस लिस्ट में केवल सिंह ढिल्लों, राज कुमार वेरका, गुरप्रीत सिंह जीपी, अश्विनी सेखड़ी, सुंदर शाम अरोड़ा, गुरप्रीत सिंह कंगड़, बलविंदर सिंह लाडी और कमिल अमर सिंह का नाम शामिल है। इन सब में सुनील जाखड़ और कैप्टन अमरिंदर सिंह का जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना गया। कैप्टन अमरिंदर सिंह लंबे समय तक पार्टी के सिपाही रहे और सुनील जाखड़ खुद प्रदेश अध्यक्ष रहे और सीएम की रेस में भी उनका नाम शामिल था।
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कांग्रेस को नुकसान
इन तमाम नेताओं के कांग्रेस छोड़ने से भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी को सीधा फायदा हुआ है। मालवा और माझा के इलाके में कांग्रेस पार्टी काफी ज्यादा कमजोर हुई। शहरी इलाके में भारतीय जनता पार्टी का जनाधार है और कांग्रसे पार्टी के कई शहरी और हिंदू चेहरे बीजेपी में शामिल हो गए, जिसका सीधा नुकसा कांग्रेस पार्टी को हुआ। इसके साथ ही इन तमाम नेताओं के छोड़ जाने के बावजूद कांग्रेस पार्टी के अंदर गुटबाजी खत्म नहीं हुई।
