उत्तर प्रदेश को आज एक और एक्सप्रेसवे मिल गया है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ता है। यह एक्सप्रेसवे शिक्षा की नगरी प्रयागराज को क्रांति धरा मेरठ से जोड़ता है। प्रदेश के 12 जिलों को जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे को रोजगार के नए मौकों, इकॉनमी को रफ्तार, आसान परिवहन और स्थानीय उद्योंगो को बढ़ावा देने वाले प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर आने वाले 12 जिले अलग-अलग उत्पादों के लिए मशहूर हैं और उम्मीद की जा रही है कि यह एक्सप्रेसवे शुरू होने से ना सिर्फ लोगों का सफर आसान होगा बल्कि इन जिलों में संबंधित उत्पादों से जुड़े कारोबार करने वाले लोग भी आर्थिक तौर पर मजबूत होंगे।

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि हरदोई से एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ राज्य की विकास यात्रा को नई गति मिलेगी। उन्होंने छह लेन (आठ लेन तक विस्तार योग्य) एक्सप्रेसवे को गांवों, किसानों, उद्यमियों और युवाओं को जोड़ने वाली जीवन रेखा बताते हुए कहा कि यह विकास को गति देने और दूरियां समेटने में अहम भूमिका निभाएगा। केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी इस प्रोजेक्ट को देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक और राज्य को आधुनिक बुनियादी ढांचे का तोहफा बताया।

 

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इकॉनमी को कैसे रफ्तार देंगे 12 जिलों के उत्पाद?

 

यह एक्सप्रेसवे मेरठ और प्रयागराज को आपस में जोड़ता है और 10 जिले इसके रास्ते में पड़ते हैं। मेरठ और प्रयागराज की प्रदेश की जीएसडीपी में हिस्सेदारी 6.3 प्रतिशत है। दोनों ही जिले GSDP में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले टॉप 5 जिलो में शुमार हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, मेरठ का GSDP में योगदान 36505 करोड़, हापुड़ का 10202 करोड़, बुलंदशहर का 23812 करोड़, अमरोहा का 15395 करोड़, संभल का 10025 करोड़, बदायूं का 15190 करोड़, शाहजहांपुर का 14811 करोड़, हरदोई का 14146 करोड़, उन्नाव का 13795 करोड़,  रायबरेली का 10668 करोड़, प्रतापगढ़ का 8848 करोड़ और प्रयागराज का योगदान 38806 करोड़ है। इस तरह प्रदेश की इकॉनमी में इन जिलों का योगदान लगभग 20 प्रतिशत के बराबर है।

 

 

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में इन जिलों के उत्पादों को देखें तो स्पोर्ट्स प्रोडक्ट, ज़री-ज़रदोज़ी, हैंडलूम, आंवला उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट, सेरैमिक प्रोडक्ट और लकड़ी के उत्पाद प्रमुख हैं। जिलों के प्रमुख उत्पादों के अलावा भी कई उद्योग ऐसे हैं जो ठीक-ठाक स्थिति में हैं लेकिन इस सड़क के शुरू हो जाने से उन्हें रफ्तार मिल सकती है और उनके लिए नए बाजार खुल सकते हैं। आने वाले समय में इस सड़क को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा जिसके जरिए इन जिलों की पहुंच बिहार तक होगी। इसके अलावा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से भी जुड़ जाने से घरेलू उत्पाद प्रदेश के ही तमाम जिलों में बेहद कम समय में पहुंच सकेंगे और उनके लिए नए-नए बाजार उपलब्ध होंगे।

 

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पूरे यूपी में आसानी से पहुंचेंगे प्रोडक्ट

मेरठ में बनने वाले स्पोर्ट्स उत्पाद को अगर मौजूदा वक्त में पूर्वी जिलों में भेजना हो तो दिल्ली या नोएडा लाकर यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए भेजा जा सकता है या फिर ट्रेन और बस के जरिए भेजा जाता है। इसमें समय ज्यादा लगता है। अब मेरठ में तैयार होने वाले स्पोर्ट्स प्रोडक्ट के अलावा, पेपर, कपड़े, केमिकल और अन्य उत्पादों को सड़क के रास्ते कम समय में भेजा जा सकेगा। इससे सामान खरीदने और बेचने वालों का समय और पैसा दोनों बचेगा।

 

इसी तरह हापुड़ स्टेनलेस पाइप, ट्यूब पापड़ और कई अन्य उत्पादों के लिए जाना जाता है। सिलाई मशीनों के अलावा लकड़ी और कागज के तमाम उत्पाद भी इस जिले में बनते हैं। हापुड़ के अलावा बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं और शाहजहांपुर जैसे जिले अभी तक जिन रास्तों पर निर्भर थे, उन पर ज्यादा समय लगता था। अगर राजधानी दिल्ली या नोएडा की ओर जाना हो या फिर पूर्व में प्रयागराज की ओर जाना हो तो सड़क के रास्ते ज्यादा समय लगता है और रेलवे के जरिए सामान भेजने में असुविधा होती है।

 

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अब सीधी पहुंच मिल जाने से ज़री-ज़रदोज़ी, सेरैमिक प्रोडक्ट्स, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट से जुड़े ये जिले अपने उत्पादों कई जिलों में कम समय में पहुंचा पाएंगे। इसी तरह प्रतापगढ़ में तैयार होने वाले आंवला उत्पाद अब ट्रेन से जाने के बजाय सड़क के रास्ते दूसरे जिलों में सीधे पहुंच सकेंगे। प्रयागराज में तैयार होने वाले मूंज उत्पाद, रायबरेली के तमाम उद्योंगो के उत्पाद और उन्नाव के चमड़ा उद्योग को भी नए मार्केट और नए अवसर मिलेंगे।

 

क्यों खास है गंगा एक्सप्रेसवे?

यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज समेत कुल 12  जिलों को जोड़ता है। इससे इन क्षेत्रों के बीच यात्रा के समय में कमी आएगी और आवागमन तेज, सुरक्षित व सुविधाजनक होगा। बयान में कहा गया कि इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किया गया है। यह छह लेन का एक्सप्रेसवे है, जिसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। आधिकारिक बयान के अनुसार इसकी एक प्रमुख विशेषता शाहजहांपुर के पास बनी 3.2 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी है, जहां आपात स्थिति में एयरफोर्स के प्लेन भी उतर सकते हैं।

 

इस पूरे एक्सप्रेस पर हाई क्वालिटी टेक्नॉलीज बेस्ड इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), सीसीटीवी निगरानी, इमरजेंसी कॉल बॉक्स और एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है। इसमें कहा गया कि एक्सप्रेसवे के किनारे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर’ (आईएमएलसी) विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें बड़े गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग सेंटर जैसी सुविधाएं बनाई जा रही हैं ताकि निवेश बढ़ाया जाए और रोजगार के मौके पैदा किए जा सकें। यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल, आगरा-लखनऊ, बुंदेलखंड और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे सहित अन्य प्रमुख कॉरिडोर से भी जुड़ेगा, जिससे सड़कों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार होगा। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी और उत्तर प्रदेश को एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएगी।