पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गरमागरम बहस छिड़ गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगामी विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों के ऐलान से चंद मिनट पहले राज्य के पुरोहितों और मुअज्जिनों के मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस फैसले के बाद अब इन धार्मिक सेवादारों को हर महीने 2,000 रुपये का मानदेय मिलेगा। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम समाज की आध्यात्मिक और सामाजिक विरासत को संजोने वालों के सम्मान में उठाया गया है।

 

हालांकि, सरकार के इस फैसले ने एक कानूनी और संवैधानिक विवाद को जन्म दे दिया है। चुनावी आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय न केवल मतदाताओं को लुभाने की कोशिश है, बल्कि भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन भी हो सकता है। विशेष रूप से आर्टिकल 14 और आर्टिकल 15 के संदर्भ में इस योजना की वैधता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

 

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आपको बता दें कि 15 मार्च को भारत के चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा की। पश्चिम बंगाल में यह चुनाव 294 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में होंगे। बंगाल में पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल और दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 14 और 15?

संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के सामने समानता और समान संरक्षण का अधिकार देता है। वहीं अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। जब राज्य सरकार सार्वजनिक खजाने से केवल विशिष्ट धार्मिक श्रेणियों के लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, तो यह 'धर्मनिरपेक्षता' के ढांचे को प्रभावित करता है। अतीत में भी कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2013 के एक फैसले में इमामों को दिए जाने वाले भत्ते को 'असंवैधानिक' करार दिया था, क्योंकि वह केवल एक धर्म विशेष के लिए था।

 

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लेकिन, इस बार मामला सिर्फ इमाम या मुसलमानों का नहीं है। इस बार हिंदू पुजारियों को भी मानदेय दिया जा रहा है। लेकिन, यह मानदेय उन लोगों को नहीं दिया जा रहा है जो हिंदू और मुसलमानों के अलावा दूसरे धर्मों की सेवा करते हैं। जैसे, गुरुद्वारे में ग्रंथी या चर्च में पादरी के लिए इस मानदेय का कोई जिक्र नहीं है। इसलिए, इस मानदेय को संविधान का उल्लंघन कहा जा रहा है।

चुनावी आचार संहिता और नैतिक सवाल

इस घोषणा के समय ने भी सबसे ज्यादा विवाद पैदा किया है। चुनाव आयोग द्वारा विधानसभा चुनाव 2026 के शेड्यूल की घोषणा करने से महज 80 मिनट पहले यह आदेश जारी किया गया। हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार नीतिगत फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन विपक्ष इसे 'अनैतिक' बता रहा है।

 

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 फुल शेड्यूल

चुनाव से जुड़ा कार्यक्रम पहला चरण (152 सीटें) दूसरा चरण (142 सीटें)
गजट नोटिफिकेशन जारी 30 मार्च 2026 (सोमवार) 2 अप्रैल 2026 (गुरुवार)
नामांकन की आखिरी तारीख 6 अप्रैल 2026 (सोमवार) 9 अप्रैल 2026 (गुरुवार)
नामांकन पत्रों की जांच 7 अप्रैल 2026 (मंगलवार) 10 अप्रैल 2026 (शुक्रवार)
नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 9 अप्रैल 2026 (गुरुवार) 13 अप्रैल 2026 (सोमवार)
मतदान की तारीख 23 अप्रैल 2026 (गुरुवार) 29 अप्रैल 2026 (बुधवार)
मतगणना (काउंटिंग) 4 मई 2026 (सोमवार) 4 मई 2026 (सोमवार)
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की अंतिम तारीख 6 मई 2026 (बुधवार) 6 मई 2026 (बुधवार)