संजय सिंह, पटना। बिहार में नई सरकार के गठन से ठीक पहले राजनीतिक माहौल बेहद गरम हो गया है। आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी अपने चरम पर है। इसी बीच जन सुराज पार्टी के अध्यक्ष प्रशांत किशोर ने दो बड़े दावे कर राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। उनके बयान सत्ता परिवर्तन से पहले कई संकेत दे रहे हैं, जिन पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
सरकार कोई भी बने, कंट्रोल दिल्ली के पास रहेगा
प्रशांत किशोर का सबसे बड़ा दावा यह है कि बिहार में चाहे मुख्यमंत्री कोई भी बने, लेकिन सरकार का वास्तविक नियंत्रण केंद्र में बैठे नेताओं के हाथ में रहेगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राज्य की सत्ता को संचालित करेंगे। उनका कहना है कि आने वाली सरकार का फोकस बिहार के समग्र विकास पर नहीं होगा, बल्कि गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों की जरूरतों को पूरा करने पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
बिहार बनेगा सस्ता मजदूर सप्लायर
प्रशांत किशोर ने एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार के बेरोजगार युवाओं को बड़ी संख्या में कम वेतन पर गुजरात भेजा जाएगा। इससे वहां की फैक्ट्रियों को सस्ता श्रम मिलेगा, जबकि बिहार में रोजगार की स्थिति जस की तस बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि यह मॉडल पहले से ही लागू है और नई सरकार के आने के बाद इसे और तेज किया जा सकता है। उनका तर्क है कि इससे बिहार के युवाओं का पलायन और बढ़ेगा, जो पहले से ही एक गंभीर समस्या है।
यह भी पढ़ें: दवा की दुकान के पीछे चल रहा था देह व्यापार, एक छापे ने खोल दी पूरी कहानी
नई सरकार, लेकिन समस्याएं वही पुरानी
अपनी दूसरी भविष्यवाणी में प्रशांत किशोर ने साफ कहा कि सरकार बदलने से बिहार की मूल समस्याओं में कोई खास सुधार नहीं होगा। उन्होंने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली जैसे मुद्दों को उठाते हुए कहा कि इन पर ठोस काम होने की संभावना बेहद कम है। उनका मानना है कि चुनाव में जनता ने विकास के मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी, बल्कि अन्य कारणों से मतदान किया। ऐसे में बेहतर शासन की उम्मीद करना वास्तविकता से दूर होगा।
मैन्यूफैक्चर्ड मैंडेट पर सवाल
प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक ताकत पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान जनसमर्थन वास्तविक नहीं, बल्कि ‘मैन्यूफैक्चर्ड मैंडेट’ है। उनके मुताबिक, यह समर्थन पैसे और प्रभाव के जरिए हासिल किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यही वजह है कि अब सत्ता परिवर्तन की स्थिति बन रही है और मुख्यमंत्री पद पर वही व्यक्ति बैठेगा, जिसे शीर्ष नेतृत्व तय करेगा।
14 अप्रैल को इस्तीफे की चर्चा तेज
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि 14 अप्रैल को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो बिहार में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद बीजेपी विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा। उसी के आधार पर मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
यह भी पढ़ें: नोएडा के मजदूरों से पाकिस्तानियों ने करवाया प्रदर्शन? UP के मंत्री का गंभीर आरोप
सियासी पारा हाई, निगाहें फैसले पर
फिलहाल बिहार की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। एक ओर सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हैं, तो दूसरी ओर प्रशांत किशोर के बयानों ने बहस को और तेज कर दिया है। अब सबकी नजरें 14 अप्रैल पर टिकी हैं, जब यह साफ हो पाएगा कि बिहार की सत्ता की बागडोर आखिर किसके हाथ में जाएगी।
