बिहार की राजनीति में इस वक्त बड़ी हलचल मची हुई है। गुरुवार को जेडीयू  के समर्थक और कार्यकर्ता बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास के बाहर जमा हो गए। वे नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले का विरोध कर रहे थे। वे चाहते हैं कि नीतीश कुमार ही बिहार के मुख्यमंत्री बने रहें।कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारे लगाए और आवास के प्रवेश द्वार पर जाम लगा दिया। वे गुस्से और दुख में थे। उनका कहना है कि नीतीश कुमार ने जनता के वोट से मुख्यमंत्री बने हैं, इसलिए उन्हें राज्य छोड़कर दिल्ली नहीं जाना चाहिए।

 

जेडीयू नेता राजीव रंजन पटेल ने एएनआई को बताया, 'हम क्या करें, रोएं नहीं तो? हमने लाठीचार्ज और मार सहकर नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया। 2025 में हम घर-घर जाकर उनके लिए वोट मांगा। अगर वे मुख्यमंत्री नहीं रहे तो बिहार की जनता कहां जाएगी? आज ही चुनाव कर लो, जो चाहो मुख्यमंत्री बना दो।'

 

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उन्होंने आगे कहा कि कार्यकर्ताओं की एक ही मांग है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा जाए। अगर कोई मुख्यमंत्री बदलना चाहता है तो चुनाव करवाए और बहुमत लाए, हम कुछ नहीं कहेंगे। लेकिन हम यहां रहेंगे और नीतीश कुमार को नामांकन दाखिल करने नहीं देंगे। निशांत कुमार का नामांकन होगा। प्रदर्शन और तेज हो गया जब कार्यकर्ताओं ने जेडीयू नेता और हिलसा विधायक कृष्ण मुरारी शरण की कार को घेर लिया और उन्हें मुख्यमंत्री आवास में जाने से रोका। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नीतीश कुमार के खिलाफ साजिश रची जा रही है। वे चाहते हैं कि नीतीश कुमार अपना कार्यकाल पूरा करें।

 

 

 

 

एक कार्यकर्ता कृष्णा पटेल ने कहा, 'बिहार की जनता ने 2025 से 2030 तक उन्हें चुना है। राज्यसभा भेजने की क्या मजबूरी है? नीतीश कुमार हमारे नेता थे, हैं और रहेंगे।' वरिष्ठ जेडीयू नेता संजय सिंह ने कहा कि फैसला मुख्यमंत्री का है। अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाना चाहते हैं तो हम विरोध नहीं कर सकते, लेकिन बिहार की जनता चाहती है कि वे मुख्यमंत्री बने रहें।

 

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने आरोप लगाया कि बीजेपी नीतीश कुमार को राज्य की राजनीति से हटाकर दिल्ली भेजना चाहती है, ताकि अपना मुख्यमंत्री बना सके। उन्होंने कहा, 'यह बहुत संभव है कि नीतीश को दिल्ली भेजकर बिहार में अपना सीएम बिठा दें।' केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ऐसे आरोपों को मजाक बताया।

 

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नीतीश कुमार ने खुद एक्स पर पोस्ट किया, 'बीस साल से ज्यादा समय से आपने मुझ पर भरोसा किया है। उसी भरोसे पर हमने बिहार की सेवा की। अब संसदीय महत्वाकांक्षा के तहत मैं इस बार राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहता हूं। बिहार के प्रति मेरा समर्पण बना रहेगा। नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।' कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह पोस्ट शायद किसी और ने लिखी या दबाव में डाली गई है। यह विरोध जेडीयू के अंदर और बिहार की राजनीति में तनाव दिखाता है। समर्थक नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से दुखी हैं और राज्य सरकार पर इसका असर देख रहे हैं।

 

एक कार्यकर्ता ने कहा,'नीतीश कुमार को हम लोग चुने हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री रहना पड़ेगा, उनको फैसला बदलना ही पड़ेगा, नहीं तो हम लोग यहीं पर धरना देते रहेंगे।'