कर्नाटक सरकार की नई अल्कोहल इन बेवरेज (AIB) एक्साइज पॉलिसी लागू होने के बाद राज्य में शराब की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 11 मई से लागू हुई इस नीति के तहत प्रीमियम बीयर और विदेशी स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में भारी कटौती की गई है, जबकि कम कीमत वाली देसी शराब महंगी हो गई है। इससे अलग-अलग वर्ग के उपभोक्ताओं पर अलग असर पड़ रहा है।
नई एक्साइज रेट लिस्ट जारी होने के बाद बाजार में शराब के दामों में तेजी से बदलाव दिखाई देने लगा है। शराब विक्रेताओं का कहना है कि सस्ती हुई प्रीमियम बीयर और विदेशी ब्रांड्स की मांग अचानक बढ़ गई है। वहीं मध्यम और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं को अब पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
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बीयर की कीमतों में बड़ी कटौती
नई नीति के तहत 5 फीसदी अल्कोहल वाली माइल्ड और लेगर बीयर की कीमतों में 20 से 25 फीसदी तक की कमी की गई है। 650 ml की किंगफिशर प्रीमियम और अल्ट्रा बीयर करीब 75 रुपये तक सस्ती हुई है। वहीं हेनेकेन की कीमत लगभग 70 रुपये कम हुई है। इसके अलावा यूबी एक्सपोर्ट और बडवाइजर प्रीमियम की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु के कई दुकानदारों ने बताया कि नई कीमतें लागू होने के बाद प्रीमियम बीयर की बिक्री तेजी से बढ़ी है।
नई टैक्स व्यवस्था का फायदा विदेशी स्कॉच व्हिस्की के ग्राहकों को भी मिला है। जॉनी वॉकर ब्लैक लेबल और शिवास रीगल जैसी प्रीमियम व्हिस्की की 750 ml बोतल अब करीब 20 फीसदी सस्ती हो गई है। पहले इनकी कीमत लगभग 5,190 रुपये थी, जो अब घटकर करीब 4,100 रुपये रह गई है।
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देसी शराब पर बढ़ा बोझ
जहां प्रीमियम शराब सस्ती हुई है, वहीं कम कीमत वाली भारतीय शराब पर टैक्स बढ़ा दिया गया है। ओरिजिनल चॉइस, बैगपाइपर और ओल्ड मोंक जैसे ब्रांड अब महंगे हो गए हैं। ओल्ड मोंक रम की कीमत 765 रुपये से बढ़कर करीब 850 रुपये तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीति का सबसे ज्यादा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
