लेह, लद्दाख में लगातार पर्यटक बढ़ रहे हैं, जिसकी वजह से यहां के पर्यावरण पर नाकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए लेह, लद्दाख प्रशासन ने शनिवार को बड़ा कदम उठाया है। दरअसल, प्रशासन अब पर्यावरण को बचाने के लिए इंसानों के 'मल' और पानी को संशोधित करके उन्हें साफ करेगा, जिसके बाद साफ पानी नदी-नालों में जाने दिया जाएगा।
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केंद्र शासित प्रदेश के पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए शनिवार को लगभग 9.12 करोड़ रुपये की लागत से एक 'मल-जल शोधन संयंत्र' बनाने की मंजूरी दी। इस प्रोजेक्ट का मकसद अनुपचारित पानी नदियों में नहीं जाने देना है।
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लंबे समय से चल रही थी प्रक्रिया
सरकार ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रोजेक्ट को लेह शहर में गंदे पानी के प्रबंधन को बेहतर बनाने और साथ ही केंद्र शासित प्रदेश के पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक लंबे समय तक चलने वाले उपाय के तौर पर तैयार किया गया है।
बड़े सीवर नेटवर्क पर बोझ कम होगा
इसमें आगे कहा गया है कि प्लांट से गंदा पानी बनने की जगह के पास ही उसका शोधन हो सकेगा, जिससे बड़े सीवर नेटवर्क पर बोझ काफी कम होगा और गंदा पानी और मल नदी के बेसिन में नहीं जा पाएगा। प्रशादन ने बताया कि उपराज्यपाल सक्सेना ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्रशासनिक मंजूरी और खर्च की अनुमति दे दी है।
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1.80 करोड़ रुपये आवंटित
सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि इसके साथ ही, नया काम शुरू करने के लिए पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को केंद्र शासित प्रदेश की कुल बचत में से शुरुआती तौर पर 1.80 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए गए हैं। इसमें ने बताया गया है कि गंदे पानी का उसके स्रोत पर ही शोधन करने, नदियों और नालों को साफ करने, पानी को दोबारा इस्तेमाल में लाने और पर्यावरण व स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए विकेंद्रीकृत व्यवस्था अपनाई गई है।
उन्होंने कहा कि इससे जमीन का भी बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित हो रहा है। प्रवक्ता ने बताया कि इससे बड़े केंद्रीय शोधन प्लांट स्थापित करने के लिए आवश्यक विशाल जमीन, भारी निवेश और लंबे समय की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
