संजय सिंह, पटना। बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है और सरकार लगातार इसकी सख्ती से निगरानी का दावा करती रही है। लेकिन शुक्रवार को राजधानी पटना में मुख्यमंत्री आवास और सचिवालय परिसर के पास महंगे ब्रांड की शराब की खाली बोतलें मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक हलचल मच गई। मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जिस समय यह घटना सामने आई, उसी दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक चल रही थी।
जानकारी के अनुसार, 5 देशरत्न मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास और सचिवालय परिसर के पास संदिग्ध हालत में कई खाली शराब की बोतलें और एक बैग पड़े होने की सूचना मिली। मौके पर मौजूद लोगों ने जब इसकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए तो मामला तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बताया जा रहा है कि बरामद बोतलें किसी महंगे विदेशी ब्रांड की थीं, जिनकी कीमत प्रति बोतल चार से पांच हजार रुपये तक बताई जा रही है।
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सचिवालय थाना प्रभारी कर रहे हैं मामले की जांच
सूचना मिलते ही सचिवालय थाना प्रभारी गौतम कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान करीब दस खाली बोतलें और दो टूटी हुई शराब की बोतलें बरामद की गईं। पुलिस ने तत्काल पूरे इलाके को घेरकर बोतलों को हटवाया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर प्रतिबंधित शराब मुख्यमंत्री आवास और सचिवालय जैसे हाई सिक्योरिटी इलाके तक कैसे पहुंची।
शराबबंदी की नीति पर शुरू हो गई बहस
घटना ने बिहार की शराबबंदी नीति पर नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की व्यवस्था पर सीधा सवाल बताते हुए हमला तेज कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि जब वीवीआईपी जोन और सरकारी परिसरों के आसपास शराब की बोतलें मिल रही हैं, तब राज्य में पूर्ण शराबबंदी के दावों की वास्तविकता खुद सामने आ रही है।
विपक्षी विधायक आईपी गुप्ता ने इस घटना को सरकार के लिए खुला तमाचा करार दिया। उन्होंने कहा कि गरीबों के घरों में शराब मिलने पर तत्काल गिरफ्तारी होती है, लेकिन बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक पुलिस की कार्रवाई नहीं पहुंचती। उन्होंने यह भी कहा कि शराबबंदी की मौजूदा व्यवस्था जमीन पर पूरी तरह विफल साबित हो रही है। आईपी गुप्ता ने सरकार से शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि नियंत्रित तरीके से शराब बिक्री शुरू करने से राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी होगी और अवैध नशे के कारोबार पर भी रोक लग सकेगी।
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सरकार ने विपक्ष के आरोप को किया खारिज
हालांकि, सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट कहा कि बिहार में शराब पीना, बेचना, भंडारण करना और तस्करी करना कानूनन अपराध है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू कर रही है और कार्रवाई व सजा के मामलों में बिहार ने रिकॉर्ड स्तर पर काम किया है। उन्होंने कहा कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मुख्यमंत्री आवास और सचिवालय जैसे अति सुरक्षित इलाके में शराब की बोतलों का मिलना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब निगाहें पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज पर टिकी हैं, क्योंकि इस घटना ने शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
