मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने हाल ही में एक फैसला दिया है जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं के अधिकारों पर एक अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि लिव इन में रहने वाली महिलाओं को पत्नी जैसा दर्जा दिया जाना चाहिए, ताकि उन्हें कानूनी और सामाजिक सुरक्षा मिल सके। कोर्ट के इस फैसले को महिलाओं की सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है और इस फैसले पर देशभर में अब बहस छिड़ गई है।
मद्रास होई कोर्ट की मदुरै बेंच की जस्टिस एस श्रीमाथी ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को पत्नी का दर्जा दिया जाना चाहिए, ताकि उन्हें कानूनी सुरक्षा मिल सके। कोर्ट ने यह फैसला एक शख्स की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए सुनाया।
यह भी पढ़ें: हरियाणा STF की बिहार में कार्रवाई, पूर्व BJP नेता के आवास पर छापा, ठगी का आरोप
गंधर्व विवाह का किया जिक्र
कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को प्राचीन गंधर्व विवाह यानी प्रेम विवाह के नजरिए से देखने की बात कही, जिसमें बिना औपचारिक रस्मों के प्रेम पर आधारित रिश्ता मान्य होता था। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को गंधर्व विवाह के तहत पत्नी का दर्जा देकर संरक्षण देना चाहिए। कोर्ट का मानना है कि इससे ऐसे संबंधों में अस्थिरता होने की स्थिति में भी उन्हें पत्नी के रूप में अधिकार मिल सके। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि गांधर्व विवाह आज कानूनी विवाह नहीं है लेकिन इसका संदर्भ यह बताने के लिए है कि सहमति आधारित रिश्तों को पूरी तरह अनैतिक या अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
किस मामले में दिया फैसला?
कोर्ट एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। शिकायतकर्ता महिला और आरोपी एक-दूसरे को स्कूल से जानते थे। बाद में दोनों के बीच प्रेम संबंध शुरू हो गए। उस व्यक्ति पर आरोप था कि वह महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहता था और उसने शादी का वादा कर कई बार उस महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए।
2024 में दोनों घर छोड़कर शादी करने के लिए भाग भी गए। महिला के परिवार की शिकायत पर पुलिस ने दोनों को वापस लाया। व्यक्ति ने महिला से शादी करने की बात कही थी लेकिन बाद में शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला ने तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के मणप्पराई ऑल वुमन पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करवाई। आरोपी ने मामला दर्ज होने के बाद अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने खारिज की याचिका
जस्टिस एस. श्रीमथी ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि आधुनिक रिश्तों में अदालतों का दायित्व है कि वे सबसे कमजोर पक्ष यानी महिला की रक्षा करें। कोर्ट का मानना है कि लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाएं कानूनी रूप से असुरक्षित स्थिति में होती हैं और इसका फायदा उठाकर कई पुरुष महिलाओं का शोषण करते हैं।
