राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा की सदस्यता को लेकर चल रही चर्चाओं पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा अब ट्रस्ट के सदस्य नहीं हैं। दोनों की सदस्यता निर्धारित अवधि पूरी होने के साथ समाप्त हो चुकी है। ट्रस्ट ने कहा कि कुछ माध्यमों में दोनों को अब भी ट्रस्ट का सदस्य बताया जा रहा है, जबकि यह तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
ट्रस्ट की ओर से जारी स्पष्टीकरण में अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के हवाले से कहा गया है कि ट्रस्ट का गठन होने के समय चंपत राय और अनिल मिश्रा को सदस्य बनाया गया था, लेकिन उनकी सदस्यता अब समाप्त हो चुकी है। वर्तमान में दोनों ट्रस्ट के सदस्य नहीं हैं।
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के पारासरन और स्वामी वासुदेवानंद भी नहीं रहे सदस्य
स्पष्टीकरण में यह भी बताया गया है कि वरिष्ठ विधिवेत्ता के पारासरन और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती भी अब ट्रस्ट के सदस्य नहीं हैं। के पारासरन ने 1991 में रामलला विराजमान की ओर से मुकदमे की पैरवी की थी और सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई तक पक्ष रखा। उनकी आयु 98 वर्ष से अधिक होने के कारण उन्होंने स्वयं सक्रिय भूमिका से अलग होने की इच्छा जताई थी। वहीं स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का भी निधन हो चुका है।
ट्रस्ट के नए सदस्य कौन हैं?
ट्रस्ट के अनुसार, रिक्त हुए पदों पर नए सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ, स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज और प्रशासनिक अधिकारी ज्ञानेश कुमार को ट्रस्ट में जिम्मेदारी दी गई है। ट्रस्ट का कहना है कि नियमों के अनुरूप समय-समय पर सदस्यता में बदलाव किए जाते हैं।
ट्रस्ट ने अफवाहों पर रोक लगाने की अपील की
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर चल रही भ्रामक सूचनाओं से भ्रम की स्थिति बन रही थी। इसलिए आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति स्पष्ट की गई है। ट्रस्ट ने लोगों से अपील की है कि केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
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क्यों अहम है यह फैसला
चंपत राय और अनिल मिश्रा राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। ऐसे में उनकी सदस्यता समाप्त होने की आधिकारिक पुष्टि को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। ट्रस्ट के स्पष्टीकरण के बाद अयोध्या से लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।


