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अनिल मिश्रा दोषी, चंपत राय का नाम गायब! SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में खुलासा

राम मंदिर के चंदा चोरी विवाद में SIT की प्राथमिक रिपोर्ट में चंपत राय का नाम ना होने से अब नए सिरे से सवाल उठने लगे हैं। इसमें तमाम कमियों के लिए अनिल मिश्रा को दोषी माना गया है।

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चंपत राय, Photo Credit: Social Media

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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने पूरे प्रकरण की तस्वीर लगभग साफ कर दी है। रिपोर्ट में ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को चढ़ावा गणना व्यवस्था की निगरानी, सुरक्षा प्रबंधन और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के प्रभावी क्रियान्वयन में विफल मानते हुए उनकी जिम्मेदारी तय की गई है जबकि पूरे मामले में लगातार सवालों के घेरे में रहे महासचिव चंपत राय का नाम इस प्रारंभिक रिपोर्ट में आरोपों के दायरे से बाहर रखा गया है।

 

एसआईटी ने अपनी जांच में 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच महज 40 दिनों में 70 बार चढ़ावा चोरी होने के साक्ष्य मिलने की पुष्टि की है। मामले में पुलिस आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनके कब्जे और ठिकानों से 78.94 लाख रुपये, विदेशी मुद्रा, बहुमूल्य सामान और गणना कक्ष से सटे शौचालय से 2.25 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। रिपोर्ट ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और चढ़ावा प्रबंधन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

40 दिनों में 70 बार चोरी, निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि 27 अप्रैल से 5 जून के बीच 70 अलग-अलग अवसरों पर चढ़ावे की चोरी हुई। हुंडियों से निकली नकदी की गणना, रिकॉर्ड मिलान और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही मिली। कर्मचारियों की प्रभावी तलाशी नहीं होती थी, निजी सामान अंदर ले जाने पर रोक का पालन नहीं कराया जाता था और बायोमीट्रिक निगरानी व्यवस्था भी प्रभावी नहीं थी। एसआईटी के अनुसार, गणना कक्ष की सीसीटीवी फुटेज में कई कर्मचारी चढ़ावे की नकदी कपड़ों, जेबों, जूतों और अन्य स्थानों पर छिपाते हुए दिखाई दिए। जांच में यह भी सामने आया कि चोरी कोई एक-दो दिन की घटना नहीं थी, बल्कि लगातार योजनाबद्ध तरीके से की जा रही थी। कई कर्मचारियों ने एक-दूसरे का सहयोग करते हुए नकदी बाहर पहुंचाई।

 

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आठ आरोपी गिरफ्तार, 78.94 लाख रुपये बरामद

इस मामले में पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे और उनके ठिकानों से 78.94 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। इसके अलावा विदेशी मुद्रा, बहुमूल्य सामान तथा गणना कक्ष से सटे शौचालय से 2.25 लाख रुपये नकद भी बरामद हुए। एसआईटी ने इन बरामदगियों को जांच के महत्वपूर्ण साक्ष्यों में शामिल किया है।

 

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में अविनाश शुक्ल, मनीष कुमार यादव, करणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और रामाशंकर मिश्रा की संलिप्तता का उल्लेख किया गया है। इनके अलावा दो अन्य आरोपियों को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान कर्मचारियों और उनके परिजनों के बैंक खातों की भी पड़ताल की गई, जिसमें संदिग्ध लेन-देन सामने आने की बात कही गई है।

अनिल मिश्रा की जिम्मेदारी तय, चंपत राय का नाम नहीं

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चढ़ावा गणना व्यवस्था की निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाने में डॉ. अनिल मिश्रा की ओर से गंभीर चूक हुई। रिपोर्ट में उनके स्तर पर जवाबदेही तय की गई है। वहीं, महासचिव चंपत राय का नाम इस प्रारंभिक रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी या आरोप के साथ शामिल नहीं किया गया, जिससे पूरे मामले में नया राजनीतिक और प्रशासनिक विमर्श शुरू हो गया है।

 

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रिपोर्ट में कहा गया है कि चढ़ावा गणना केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी। कर्मचारियों की तलाशी, सीसीटीवी की सक्रिय निगरानी, प्रवेश-निकास नियंत्रण और नकदी की सुरक्षित गणना जैसी व्यवस्थाओं में गंभीर कमियां थीं। इन्हीं खामियों का फायदा उठाकर लंबे समय तक चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया।एसआईटी की यह प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है।

 

अंतिम रिपोर्ट आने के बाद मामले में प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर आगे की कार्रवाई होगी। हालांकि प्रारंभिक रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चढ़ावा चोरी कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि लंबे समय तक चली सुनियोजित गतिविधि थी, जिसने राम मंदिर ट्रस्ट की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

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