श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं अब खुलकर सामने आने लगी हैं। राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के संचालन तक अहम भूमिका निभाने वाले महासचिव चंपत राय के संभावित उत्तराधिकारी को लेकर मंथन तेज हो गया है। विश्व हिंदू परिषद और ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, महासचिव पद के लिए फिलहाल दो नाम सबसे मजबूत माने जा रहे हैं- विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता बजरंग बागड़ा और ट्रस्टी कृष्णमोहन।
ये दोनों ही लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रस्ट भविष्य की जिम्मेदारी किसी ऐसे चेहरे को सौंपना चाहता है, जिसे संगठन, संत समाज और ट्रस्ट के कामकाज का व्यापक अनुभव हो।
बजरंग बागड़ा क्यों माने जा रहे सबसे मजबूत दावेदार?
राजस्थान के उदयपुर निवासी बजरंग बागड़ा विश्व हिंदू परिषद का एक बड़ा और भरोसेमंद चेहरा माने जाते हैं। वे वर्षों तक संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वर्ष 2024 में अयोध्या में हुए विहिप के बड़े आयोजनों और रणनीतिक बैठकों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगठन विस्तार, संत समाज के साथ समन्वय और राम मंदिर आंदोलन के दौरान सक्रिय भूमिका के कारण उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा है। विहिप के भीतर उनकी स्वीकार्यता और संगठनात्मक अनुभव उन्हें महासचिव पद का मजबूत दावेदार बनाता है।
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कृष्णमोहन का ट्रस्ट अनुभव भी बड़ी ताकत
दूसरे प्रमुख दावेदार कृष्णमोहन वर्तमान में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं। ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों, निर्णय प्रक्रिया और मंदिर प्रबंधन की बारीकियों से उनका सीधा जुड़ाव रहा है। लंबे समय से ट्रस्ट की गतिविधियों में सक्रिय रहने के कारण उन्हें व्यवस्था का अनुभवी चेहरा माना जाता है। यही वजह है कि नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के बीच उनका नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है।
नीरज दौनेरिया को भी मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट में केवल महासचिव पद ही नहीं बल्कि अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को लेकर भी विचार-विमर्श चल रहा है। ऐसे में नीरज दौनेरिया को भी ट्रस्ट में अहम दायित्व दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि उन्हें महासचिव बनाए जाने की चर्चा कम है, लेकिन संगठन में उनकी भूमिका बढ़ सकती है।
राम मंदिर का निर्माण पूरा होने और दर्शन व्यवस्था नियमित होने के बाद अब ट्रस्ट का फोकस मंदिर के दीर्घकालिक संचालन, विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने पर है। ऐसे में भविष्य के नेतृत्व को लेकर मंथन को स्वाभाविक माना जा रहा है। ट्रस्ट चाहता है कि संगठनात्मक अनुभव, प्रशासनिक क्षमता और राम मंदिर आंदोलन की समझ रखने वाला चेहरा आगे की जिम्मेदारी संभाले।
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आधिकारिक घोषणा का इंतजार
हालांकि, महासचिव पद को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन ट्रस्ट की ओर से अभी किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अंतिम निर्णय ट्रस्ट के स्तर पर ही लिया जाएगा। फिलहाल राम मंदिर और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े सभी वर्गों की नजर इस बात पर टिकी है कि चंपत राय के बाद ट्रस्ट की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आखिर किसे सौंपी जाती है।