मणिकर्णिका घाट को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें दिखाया जा रहा था कि प्रशासन ने मणिकर्णिका घाट पर एक मंदिर को तोड़ दिया था।

 

दावा किया जा रहा था कि यह काम 29 हजार 350 वर्गफीट के एरिया में विकास कार्य के लिए किया गया। प्रशासन इस दौरान बुलडोजर की मदद से घाट पर मौजूद पत्थरों को तोड़ रहा था और उसे बड़ी नाव की मदद से गंगा पार भेज रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों का आरोप था कि छोटे मंदिरों को भी वहां से हटाया गया।

 

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क्या बोला प्रशासन?

हालांकि, एडीएम वाराणसी ने कहा कि जो लोग विरोध कर रहे हैं वे बाहरी तत्त्व हैं और वहां के लोग इस प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई उच्चाधिकारियों से बात करके की जाएगी।

 

 

 

 

मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने भी कहा था कि यह काम काफी चैलेंजिंग हैं और पूरा होने पर लोगों को काफी लाभ मिलेगा। उन्होंने भी कहा था कि किसी भी मंदिर को हटाया नहीं जा रहा है।

 

इस घाट के रिनोवेशन की शुरुआत 19 महीने पहले हुई थी लेकिन बाढ़ की वजह से इसे बीच में बंद करना पड़ा था। पीएम मोदी ने साल 2023 में इस विकास कार्य का शिलान्यास भी किया था।

लोगों ने क्या कहा?

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि प्रशासन ने अहिल्या बाई होल्कर का बनवाया हुआ पुराना मंदिर तोड़ दिया और इसे तोड़कर कॉरिडोर बनवाया जाएगा। एक यूजर ने कहा कि विकास के नाम पर सैकड़ों साल पुराने मंदिरों को तोड़ दिया गया।

 

 

 

 

 

क्या है प्रोजेक्ट?

मणिकर्णिका का विकास 18 करोड़ की लागत से सीएसआर फंड से किया जाना है। यह निर्माण कार्य नगर निगम की देखरेख में किया जा रहा है। यहां की मिट्टी नीचे से मजबूत नहीं है इसलिए इसलिए 15 से 20 मीटर नीचे तक पाइलिंग कराई गई है। इसके लिए सख्त मिट्टी तक पाइलिंग का काम किया गया है ताकि बाढ़ में किसी भी तरह से दिक्कत न हो।

 

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कैसा दिखेगा घाट?

योजना के मुताबिक श्मशान घाट पर कई मीटर ऊंची चिमनी लगाई जाएगी ताकि चिता की राख हवा की सतह से उड़ जाए और आसपास के घरों तक न पहुंचे। इसके अलावा घरों में शवों को स्नान कराने के लिए पवित्र जलकुंड इत्यादि बनवाए जाएंगे। साथ ही सर्विस एरिया, अपशिष्ट को इकट्ठा करने के लिए व्यवस्था और रजिस्ट्रेशन कक्ष के साथ साथ टॉयलेट भी बनवाया जाएगा।