स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की 'गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध' यात्रा ने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक और धार्मिक हलचल तेज कर दी है। अपनी यात्रा के दूसरे दिन शनिवार को वह रायबरेली पहुंचे, जहां स्थानीय समाजसेवी यश राकेश पाण्डेय ने उन्हें अपने आवास पर रात्रि विश्राम की व्यवस्था की। यह घटना इसलिए चर्चा में रही क्योंकि यश पाण्डेय बीजेपी समर्थित विधायक मनोज पाण्डेय के भतीजे हैं और उन्होंने अपने चाचा पर खुलकर हमला बोला।
यश राकेश पाण्डेय ने एक न्यूज पोर्टल को दिए इंटरव्यू में अपने चाचा मनोज पाण्डेय को 'धोखेबाज' करार देते हुए कहा कि वह सत्ता के साथ नहीं, बल्कि सत्य और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ खड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मनोज पाण्डेय ने उनके पिता की मृत्यु और परिवार के कठिन समय में राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की, जिसे 'आपदा में अवसर' तलाशने जैसा बताया। यश ने गौ-रक्षा और सनातन धर्म के मुद्दों पर सरकार की नीतियों की आलोचना की तथा स्वामी जी के आह्वान पर पूरा समर्थन जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर हाल में वे महाराज जी के साथ रहेंगे।
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सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
इस बीच, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्य बीफ निर्यात में देश में पहले नंबर पर है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि 2012 से 2019 के बीच उत्तर प्रदेश में 15 से 18 लाख गायों की संख्या घटी है। उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से बीफ निर्यात करने वाली कंपनियों से बीजेपी को चंदा मिलने का आरोप लगाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। कड़े शब्दों में उन्होंने कहा, 'हत्यारों के नोट और गौ-भक्तों के वोट अब एक झोली में नहीं रहेंगे।' अविमुक्तेश्वरानंद ने गाय को मां का दर्जा देने और बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग दोहराई।
आशुतोष ब्रह्मचारी पर हमले को लेकर बयान
एक अन्य विवादास्पद मुद्दे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सफाई दी। उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी (महाराज) पर रीवा एक्सप्रेस में कथित हमले को उन्होंने बदनामी की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि ट्रेन में सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे की है और बाथरूम से निकलने के बाद हमले का दावा मात्र उन्हें फंसाने की कोशिश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे शारीरिक हिंसा के पक्षधर नहीं हैं और सभी आरोपों का जवाब केवल तर्कों से देंगे।
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लखनऊ कार्यक्रम पर भी सफाई
अविमुक्तेश्वरानंद ने 11 मार्च को लखनऊ में प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए अनुमति न मिलने पर सरकार को चेतावनी भी दी। उनकी यह यात्रा वाराणसी से शुरू होकर जौनपुर, सुलतानपुर, रायबरेली होते हुए लखनऊ तक जा रही है, जहां 12 मार्च को 'शंखनाद' का कार्यक्रम निर्धारित है। यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश की राजनीति में गौ-रक्षा और धार्मिक मुद्दों को लेकर बढ़ते तनाव को दर्शाता है।
