बटुकों के कथित यौन शोषण मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने यौन शोषण मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अदालत ने अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई से भी सुरक्षा प्रदान की है। बता दें कि प्रयागराज के विशेष पॉक्सो अदालत के आदेश पर झूंसी पुलिस थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके एक शिष्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की। सभी पक्षों को सुनने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी और अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। हालांकि हाई कोर्ट ने उन्हें जांच में पुलिस को सहयोग देने और यूपी सरकार व मुकदमा के वादी आशुतोष पांडेय को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
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'मामले में झूठा फंसाया गया'
अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का पक्ष रखा। उन्होंने हाई कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय कई आपराधिक मामलो में संलिप्त हैं। याचिकाकर्ता को प्रदेश सरकार के इशारे पर झूठा फंसाया गया है। पीड़ित बटुक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम में कभी नहीं रहे हैं। उधर, यूपी सरकार ने अग्रिम जमानत याचिका सत्र अदालत में दायर करने के बजाय सीधे उच्च न्यायालय में दायर करने पर सवाल उठाया।
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कब दर्ज हुआ मामला?
21 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पोक्सो कोर्ट के एडीजे विनोद कुमार चौरसिया ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी और अन्य के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद यूपी पुलिस ने झूंसी थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उनके खिलाफ शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शिकायत दी थी।