गुरुग्राम की एक हाउसिंग सोसाइटी ने एक अजीबोगरीब फैसला लिया है। जिसका असर स्विगी और जोमैटो डिलीवरी जैसे सेवाओं पर अगर दिखेगा। सेक्टर-49 स्थित 'उप्पल साउथएंड' हाउसिंग सोसाइटी ने मेंटेनेंस फीस न देने वाले निवासियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। सोसाइटी में अब डिफॉल्टर निवासियों के नाम मेन गेट पर लगे नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक कर दिए गए हैं। इस कदम का मकसद बकाया वसूली को तेज करना और बाकी निवासियों को समय पर भुगतान के लिए प्रेरित करना बताया जा रहा है।
सोसाइटी मैनेजमेंट ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक बकाया राशि जमा नहीं की जाती, तब तक कई गैर-जरूरी सुविधाएं बंद कर दी जाएंगी। नोटिस के अनुसार, मेड सर्विस, कार वॉशिंग और फूड डिलीवरी ऐप्स जैसे जोमैटो और स्विगी की सेवाएं भी डिफॉल्टर निवासियों के लिए रोक दी गई हैं। साथ ही, ऐसे लोगों को RWA के सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति भी नहीं होगी।
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रिपोर्ट के अनुसार, सोसाइटी में मेंटेनेंस फीस का बकाया कोई नई समस्या नहीं है। कई निवासियों पर वर्षों से बकाया चला आ रहा है। कुछ मामलों में यह रकम 2009 और 2012 से लंबित है, जबकि कई लोगों का बकाया एक लाख रुपये से भी अधिक हो चुका है। सोसाइटी के अन्य निवासियों का कहना है कि इस वजह से रखरखाव और सुविधाओं पर असर पड़ता है।
RWA के पास कौन-सी शक्तियां होती हैं?
RWA यानी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन आमतौर पर राज्य के अपार्टमेंट एक्ट या सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड होते हैं। इनका काम सोसाइटी के कॉमन एरिया की देखरेख करना, मेंटेनेंस चार्ज इकट्ठा करना और उन नियमों को लागू करना होता है, जिन पर सभी निवासी पहले ही सहमत हो चुके होते हैं।
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हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है RWA ऐसी संस्थाएं नहीं हैं जिन्हें कोई सरकारी या कानूनी अधिकार प्राप्त हो। वे केवल प्रशासनिक समितियां हैं, जिनकी शक्तियां पूरी तरह से उनके द्वारा बनाए गए नियमों तक ही सीमित होती हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि RWA के नियम आपके मौलिक अधिकारों को रद्द नहीं कर सकते और न ही वे किसी मौजूदा कानून का उल्लंघन कर सकते हैं।
