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राज्यसभा चुनाव के बाद बिहार कांग्रेस में भूचाल, 3 विधायकों के कदम से मचा हड़कंप

बिहार राज्यसभा चुनाव ने बिहार कांग्रेस के घमासान को दुनिया के सामने ला दिया है। चुनाव से तीन विधायकों की दूरी ने पार्टी नेतृत्व को असहज कर दिया है। अब आलाकमान ने 48 घंटे में तीनों विधायकों से सफाई मांगी है।

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सोनिया, राहुल और मल्लिकार्जुन खरगे। (Photo Credit: PTI)

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संजय सिंह, पटना। बिहार की सियासत में राज्यसभा चुनाव के बाद जबरदस्त भूचाल आ गया है। मतदान के दिन कांग्रेस के तीन विधायकों का रहस्यमयी ढंग से गायब हो जाना अब महज अनुपस्थिति नहीं, बल्कि खुली बगावत के तौर पर देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ महागठबंधन की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, बल्कि बिहार कांग्रेस के भीतर सुलग रही अंदरूनी जंग को भी सरेआम उजागर कर दिया है।

 

प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेन्द्र प्रसाद और मनोज विश्वास से 48 घंटे के भीतर जवाब तलब किया है। उन्होंने साफ कहा है कि 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में इनकी अनुपस्थिति ने पार्टी को सीधा नुकसान पहुंचाया है।

 

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मतदान के दौरान तीनो विधायक के संपर्क गायब

सूत्रों के मुताबिक मतदान के दौरान पार्टी नेतृत्व इन विधायकों से लगातार संपर्क साधता रहा, लेकिन तीनों के मोबाइल फोन या तो नहीं उठे या फिर स्विच ऑफ मिले। इस ‘साइलेंस’ ने ही सियासी शक को और गहरा कर दिया है। मतदान में तीनो विधायक ने भाग नहीं लिया, जिसके कारण महागठबंधन उम्मीदवार की हार हुई।

वोट नहीं डाला, मगर धमाका कर दिया

असली सियासी धमाका तब हुआ, जब विधायक मनोज विश्वास ने खुद अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम पर बड़ा आरोप जड़ दिया। उन्होंने दावा किया, 'प्रदेश अध्यक्ष के कहने पर ही मैंने वोट नहीं डाला।' इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर की खींचतान अब खुली लड़ाई में बदलती नजर आ रही है। 

 

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दिल्ली तक गूंजा घमासान

कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब सिर्फ पटना तक सीमित नहीं रही। सूत्रों के मुताबिक मामला सीधे दिल्ली दरबार तक पहुंच चुका है। जहां पार्टी आलाकमान ने इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है। माना जा रहा है कि जल्द ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें निलंबन या अन्य कड़े कदम भी शामिल हो सकते हैं। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस के लिए डबल झटका मान रहे हैं। एक तरफ चुनावी हार, दूसरी तरफ संगठन के भीतर बगावत। महागठबंधन के सहयोगी दल भी इस घटनाक्रम से असहज हैं और इसे भरोसे के संकट के तौर पर देख रहे हैं।

गायब विधायक पर टिकीं निगाहें 

अब सबकी निगाहें, उन तीन विधायकों के जवाब पर टिकी हैं, जिनकी ‘गायब’ भूमिका ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। सवाल बड़ा है- क्या यह महज अनुशासनहीनता है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी सियासी साजिश। फिलहाल इतना तय है कि राज्यसभा चुनाव का यह 'ड्रामा' आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासों की भूमिका तैयार कर सकता है।


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