उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक युवा इंजीनियर युवराज मेहता सिस्टम एक जगह भरे पानी में डूबकर अपनी जान गंवा बैठा। इस मौत की खबर सामने आते ही प्रशासन पर सवाल खड़े होने लगे थे। अब इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि युवराज की मौत मामले में उनकी भूमिका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है। उनकी गिरफ्तारी नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने की है।
युवराज की मौत के मामले में लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और विजटाउन प्लानर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। अभय कुमार एमजेड विजटाउन के मालिक हैं । इस मामले पर एसआईटी जांच तेज कर दी गई है। युवराज के परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मौके पर सुरक्षा के सही इंतजाम होते, तो इस हादसे को रोका जा सकता था। इस हादसे के बाद से नोएडा अथॉरिटी के काम करने के तरीकों पर सवाल उठने लगे हैं।
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कैसे हुआ था हादसा?
16 जनवरी को नोएडा के सेक्टर-150 में यह हादसा हुआ था। 27 साल का युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता अपनी कार से जा रहे थे और वहां एक कंस्ट्रक्शन साइट के पास पानी से भरे गड्ढे में उनकी कार गिर गई। यह गड्ढा एक मॉल में बेसमेंट को बनाने के लिए खोदा गया था लेकिन सुरक्षा के लिए वहां किसी प्रकार की चेतावनी या अन्य सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे। इसी लापरवाही के कारण युवराज की कार हादसे का शिकार हो गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, युवराज शाम के समय अपने ऑफिस से घर आ रहे थे और उस समय उनका कार से कंट्रोल खो गया और कार गड्ढे में जा गिरी। उस गड्ढे में पानी भरा था। युवराज किसी तरह अपनी कार के छत पर आ गया था और उसने अपने पिता को भी फोन किया था। युवरात करीब 90 मिनट तक मदद की गुहार लगाता रहा लेकिन जब तक उसे बाहर निकाला गया तब तक वह मर चुका था।
शुरू हुई जांच
इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है। एसआईटी ने मंगलवार को अपनी जांच शुरू कर दी है। सीनियर अधिकारी भानु भास्कर के नेतृत्व में टीम इस मामले की जांच कर रही है। एसआईटी ने पहले मीटिंग की और मीटिंग खत्म होते ही टीम घटनास्थल की ओर रवाना हो गई। एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जा चुकी है और अब मृतक के परिजनों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों को सामने लाने के बाद जांच रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। इस मामले में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। एसआईटी इस पहलू पर जांच कर रही है कि लंबे समय तक मदद मांगने के बाद भी युवरात की मदद क्यों नहीं की गई।
