उत्तर प्रदेश के नोएडा में सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की सिस्टम की लापरवाही की वजह से जान चली गई। युवा इंजीनियर 'सिस्टम की गलती' से भरे पानी में डूबकर अपनी जान गंवा बैठा। घटना के चार दिन बीत जाने के बाद एक के बाद एक सरकारी सिस्टम की परतें और पोल खुलती जा रही हैं।
दरअसल, पहले तो पुलिस को पता था कि इंजीनियर पानी में डूब रहा है, मगर मदद पहुंचाने के लिए बने SDRF, NDRF और पुलिस की तरफ से समय पर मदद नहीं पहुंची।
अब समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया है कि नोएडा में पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान जाने से दो साल पहले, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की तरफ से एक आधिकारिक बयान में अधिकारियों को इलाके में जमा बारिश के पानी और लगातार गटर के गंदे पानी से होने वाले खतरे के बारे में चेतावनी देते हुए हेड रेगुलेटर बनाने की बात कही थी।
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नोएडा अथॉरिटी को लिखा था पत्र
सिंचाई विभाग ने 2023 में नोएडा अथॉरिटी को भेजे गए पत्र में सेक्टर-150 में हेड रेगुलेटर बनाने की तुरंत जरूरत बताई थी, ताकि जमा हुए बारिश के पानी को गहरे गड्ढे से बाहर निकाला जा सके और उसे हिंडन नदी में भेजा जा सके।
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जल निकासी को रेगुलेट नहीं किया गया
तीन साल पहले सरकारी बयान में कहा गया था कि अगर जल निकासी को रेगुलेट नहीं किया गया, खासकर बारिश के समय या नदी में पानी कम छोड़ने पर, तो निचले इलाकों में पानी का जमाव और भी खराब हो सकता है। सिंचाई विभाग के आदेश से वाकिफ अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रस्तावित काम के लिए बजट का इंतजाम पहले ही कर दिया गया था। उसी समय करोड़ों रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया था। हालांकि, इस प्रोजेक्ट पर कभी काम शुरू नहीं हो सका है।
बाद में स्थानीय लोगों ने पीटीआई को बताया कि अगर सिंचाई विभाग के सुझाव के मुताबिक हेड रेगुलेटर बनाया गया होता, तो जिस गड्ढे में यह जानलेवा हादसा हुआ, उसमें लंबे समय तक पानी भरा नहीं रहता। बता दें कि हेड रेगुलेटर एक कंट्रोल स्ट्रक्चर है जो पानी के बहाव को कंट्रोल करता है, जिससे नालियों और नहरों में पानी और गाद ज्यादा जमा नहीं होती।
मामला क्या है?
बता दें कि नोएडा के सेक्टर-150 में 16 जनवरी को हुई घटना में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। उसकी कार निर्माणाधीन स्थल के पास पानी से भरे गड्ढे में गिर गयी थी और उस निर्माणाधीन स्थल पर कोई अवरोधक भी नहीं था। यह गड्ढा एक मॉल के भूमिगत तल के निर्माण के लिए खोदा गया था। इस घटना में लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं।