गाजियाबाद में एक चार साल की बच्ची के रेप और मर्डर मामले में जांच प्रक्रिया और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर और SHO को सोमवार को कोर्ट में तलब किया है। कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस के रवैये को असंवेदनशील बताया और अधिकारियों को 13 अप्रैल को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है।
इस मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत की बेंच ने इस बात पर हैरानी जताई की जब दो प्राइवेट अस्पतालों ने पीड़िता का इलाज करने से मना कर दिया था तो पुलिस ने पीड़ितों की मदद क्यों नहीं की। इसे कोर्ट ने लापरवाही माना और फटकार लगाई। इसके साथ ही पुलिस पर इस रेप और मर्डर मामले में आरोपी को कस्टडी में गोली मारने का भी आरोप है।
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क्या है पूरा मामला?
16 मार्च को गाजियाबाद में एक पडो़सी एक चार साथ की बच्ची को कथित तौर पर चॉकलेट दिलाने के बहाने अपने साथ लेकर गया था। बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी तो मां-बाप को उसकी चिंता हुई। बच्ची की तलाश शुरू की गई और जब वह मिली तो माता-पिता हैरान रह गए। पिता बच्ची बेहोश हालत में खून से लथपथ मिली। बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया लेकिन स्थिति खराब होने के कारण बच्ची की मौत हो गई थी।
दरिंदगी और लापरवाही
मामला यहीं खत्म नहीं होता। बच्ची के साथ बेरहमी से दरिंदगी की गई और उसे छोड़ दिया गया। जब पिता ने बेटे को देखा तो वह कांप उठे। उन्होंने बेटी को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाना चाहा लेकिन दो प्राइवेट अस्पतालों ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया। सीजेआई ने इस बात पर हैरानी जताई है कि अस्पताल ऐसा कैसे कर सकते हैं। बच्ची के प्राइवेट पार्ट में कोई वस्तु डाली गई थी।
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पुलिस ने धमकाया
अस्पताल वालों ने जब बच्ची को भर्ती नहीं किया तो उसके पिता ने पुलिस से मदद मांगी। पुलिस ने उल्टा उन्हीं के साथ मारपीट की और मुंह बंद रखने के लिए धमकाया। पुलिस ने FIR भी एक दिन बाद लिखी। कोर्ट पुलिस के इस रवैये पर काफी नाराज है। इसके अलावा जब आरोपी को गिरफ्तार किया गया तो कस्टडी में ही उसके पैर में गोली मार दी गई। कोर्ट ने इस पर कहा कि पुलिस की थ्योरी दिलचस्प है। अब कोर्ट ने इस लापरवाही को प्लाइंट आउट किया और पुलिस पर कई सवाल उठाए। कोर्ट ने सफाई देने के लिए पुलिस कमिश्नर और SHO को कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा है।
