दिल्ली में लोगों के लापता होने के बढ़ते मामलों को लेकर संसद की स्थायी समिति ने गंभीर चिंता जताई है। अब गृह मंत्रालय से जुड़ी एक संसदीय समिति ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट लाकर कुछ सिफारिशें की हैं। रिपोर्ट में कहा है कि दिल्ली जैसे बड़े शहर में गुमशुदगी के मामले केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सुरक्षा मुद्दा भी है। खासतौर पर महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।

 

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल की अध्यक्षता वाली समिति ने जोर देकर कहा कि इन मामलों को समझने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि गहराई से शोध और डेटा आधारित अध्ययन जरूरी है। समिति का मानना है कि जब तक गुमशुदगी के पीछे के सामाजिक, आर्थिक और व्यवहारिक कारणों को नहीं समझा जाएगा तब तक इन मामलों को प्रभावी ढंग से रोका नहीं जा सकता।

 

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रिसर्च से समझेंगे गुमशुदगी के कारण

समिति ने अपनी 257वीं रिपोर्ट में सिफारिश की है कि दिल्ली पुलिस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ मिलकर एक व्यापक अध्ययन करे। इस अध्ययन में यह जानने की कोशिश की जाएगी कि लोग किन परिस्थितियों में लापता होते हैं और इसके पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार हैं।

 

इसके साथ ही समिति ने सुझाव दिया है कि दिल्ली के आंकड़ों की तुलना देश के अन्य महानगरों और कुछ अंतरराष्ट्रीय शहरों से भी की जाए। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सी नीतियां और तरीके बेहतर काम कर रहे हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।

 

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महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने पर जोर

रिपोर्ट में पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है। समिति ने कहा है कि कुल पुलिस बल में कम से कम 33 प्रतिशत महिला कर्मियों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके लिए एक तय समयसीमा के साथ चरणबद्ध योजना बनाने को कहा गया है।

 

समिति का मानना है कि महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ने से पुलिसिंग अधिक संवेदनशील बनेगी और महिलाओं व कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में बेहतर प्रतिक्रिया मिल सकेगी। इससे जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।

 

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रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई लोग पुलिस थाने जाने से हिचकिचाते हैं। इसकी वजह पारदर्शिता की कमी, पहुंच में दिक्कत और पुलिस से संवाद में असहजता है। समिति ने कहा कि इन समस्याओं को दूर करना बेहद जरूरी है क्योंकि इससे अपराध की रिपोर्टिंग पर असर पड़ता है।

 

इस दिशा में सुधार के लिए समिति ने पुलिस थानों में 'वन स्टॉप सिटिजन सर्विस डेस्क' बनाने, सामुदायिक अधिकारियों की तैनाती और महिलाओं, बच्चों व वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग सहायता केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया है। समिति का मानना है कि इन कदमों से पुलिस और आम जनता के बीच दूरी कम होगी और कानून व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।