राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक अजीबो-गरीब घटना सामने आई है, जिसे देखकर लोग हैरान हो रहे हैं। भीलवाड़ा जिले में अफीम की खेती होती है। इन खेतों के आसपास तोतों के कई झुंड देखे गए हैं, जो कथित तौर पर अफीम के फूलों और डोडों को चोंच मारते हैं। इसके बाद तोते नशे में आ जाते हैं। नशे की वजह से तोते उड़ने में भी असमर्थ हो जाते हैं और खेत के पास मौजूद बिजली के तार पर उल्टा लटकने जैसी अजीबो-गरीब हरकतें करते हैं।
अफीम को एक बार खाने से तोतों को इसकी लत लग जाती है, जिस वजह से हर दिन वह अफीम का नशा करने लगते हैं। खबरों के मुताबिक, राजस्थान के जिन जिलों में अफीम की खेती होती है, उन इलाकों में करीब 2.5 लाख तोतों की आबादी रहती है, जो अफीम खाती है। इससे किसानों की फसल खराब हो जाती है और लाखों रुपयों का नुकसान हो रहा है।
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अफीम के खेतों को भारी नुकसान
राजस्थान के चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, झालावाड़, कोटा, बारां और उदयपुर में अफीम की खेती होती है, जहां तोतों का आतंक मचा हुआ है। वे तोते अफीम के फूल और डोडे खाकर फसल को नष्ट कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। लोगों के अनुमान के मुताबिक, ये तोते फसल का करीब 20 फीसदी तक नुकसान कर रहे हैं, जिसकी वजह से किसानों को लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
किसान अफीम की फसल को तोतों से बचाने के लिए कई कोशिशें कर रहे हैं। मिसाल के तौर पर खेत के पास पटाखे फोड़कर तोतों को डराना, खेतों में पुतले लगाना ताकि तोते डर जाएं, लेकिन ये तोते इतने जिद्दी हो गए हैं कि बार-बार अफीम के खेतों के पास आकर बैठ जाते हैं। अफीम किसान समिति के अध्यक्ष का इस मामले में कहना है कि 'अफीम किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या डोडों को पक्षियों से बचाना है। पौधों पर डोडे आने के बाद सबसे ज्यादा नुकसान तोते पहुंचाते हैं। तोते डोडे खाकर नशेड़ी हो रहे हैं।'
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अफीम क्या होती है?
अफीम एक प्रकार की पौधा होता है। इस पौधे के कच्चे डोडे को चीरने के बाद दूध जैसा पदार्थ निकलता है। फिर इस दूध को सुखाकर अफीम बनाई जाती है। इस अफीम का इस्तेमाल कानूनी तौर पर दर्द निवारक दवाओं के निर्माण में किया जाता है।
भारत में अफीम की खेती वही किसान कर सकता है, जिसे केंद्र सरकार की तरफ से खेती करने का लाइसेंस मिला हो। अवैध अफीम की फसल पूरी तरह से गैर-कानूनी है। भारत में अफीम की खेती मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में की जाती है।
