हिमाचल प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव मई महीने में होने वाले हैं। ऐसे में ग्राम पंचायत का एक चौकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शिमला के तांगणू और जांगलिख गांव पंचायत में कथित तौर 44 साल के लोगों को भी वृद्धावस्था पेंशन दी जा रही थी। आरोप के मुताबिक 44 से 55 साल की उम्र के लोगों ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाए थे। साथ ही ग्राम पंचायत पर भी आरोप लगा है कि लोगों के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई, जिस वजह से लोगों को पेंशन मिल रही थी। इस मामले का पर्दाफाश जिला कल्याण अधिकारियों ने किया, जिन्होंने ई-मेल के जरिए पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अधिकारी इस मामले की जांच-पड़ताल कर रहे हैं।
यह मामला शिमला के चिड़गांव ग्राम पंचायत के गांव तांगणू और जांगलिख का है, जहां लगभग 44 लोगों को फर्जी तरीके से पेंशन मिल रही थी। जिला कल्याण विभाग का आरोप है कि इस पंचायत में कई लोगों ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर वृद्धावस्था पेंशन हासिल की थी। पुलिस के शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि पंचायत के सदस्यों ने रजिस्टर में छेड़छाड़ की थी, जिसमें लोगों की उम्र बढ़ाकर उन्हें वृद्धावस्था पेंशन दिलाई गई। इस घटना ने ग्राम पंचायत व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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कैसे हुआ वृद्धावस्था पेंशन का फर्जीवाड़ा ?
वृद्धावस्था पेंशन उन लोगों को दी जाती है जिनकी उम्र 60 साल या उससे अधिक हो। आरोपों के मुताबिक तांगणू गांव के 20 और जांगलिख के 25 लोगों ने फर्जी कागजों के जरिए खुद को बुजुर्गों की सूची में शामिल कराया। इनमें 19 महिलाएं और 26 पुरुष शामिल हैं, जिनकी उम्र लगभग 44 से 55 साल बताई जा रही है।
पुलिस शिकायत के मुताबिक आरोपी लोगों ने साल 2021 से 2025 के बीच फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाए थे। इसके बाद कथित तौर पर ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में भी हेरफेर की गई। फर्जी कागजों के आधार पर वृद्धावस्था पेंशन ली जा रही थी। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में कुल 44 लोगों को आरोपी पाया है।
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पुलिस जांच में क्या पता चला ?
पुलिस इस मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है। पूछताछ में पुलिस अधिकारियों को पता चला है कि गांव के लोगों को पहले से ही पंचायत सदस्यों पर शक था। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की है।
