सेहत के प्रति फिक्रमंद रहने वाले प्रतीक यादव की आकस्मिक निधन से हर कोई हैरान है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट के छह निशान मिले हैं। खून का थक्का बनने से दिल तक खून नहीं पहुंच पाया और सांस लेने में तकलीफ हुई। इसी को मौत की वजह बताया जा रहा है।

 

अब खुलासा हुआ है कि प्रतीक यादव पिछले छह माह में 5 बार अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। वे हाई ब्लड प्रेशर और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस के पीड़ित थे। 29 अप्रैल को उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई। इसके बाद उन्हें मेदांता के आईसीयू में एडमिट किया गया था। 

 

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12 मई की रात दो बार बिगड़ी तबीयत

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक 12 मई की रात को दो बार प्रतीक यादव की तबीयत बिगड़ी। दोनों बार होने अस्पताल ले जाना पड़ा। लखनऊ सिविल अस्पताल के निदेशक जीपी गुप्ता ने भी इस बात की पुष्टि की और बताया कि बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे ड्राइवर प्रतीक को लेकर आया था। 

 

प्रतीक यादव का इलाज करने वालीं डॉ. रुचिता शर्मा ने बताया कि प्रतीक हाइपरटेंशन से जूझ रहे थे। सीने में दर्द और सांस लेने में समस्या के चलते उन्हें 29 अप्रैल को अस्पताल के भर्ती कराया गया था। वह वेन थ्रॉम्बोसिस से भी जूझ रहे थे। जांच में पता चला कि उन्हें पल्मोनरी एम्बोलिज्म भी हुआ था। इसमें खून का थक्का धमनियों में बन जाता है। वे बीपी की दवा भी लेते थे।

मृत अवस्था में पहुंचे अस्पताल

प्रतीक यादव यूपी के दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे थे। 13 मई को लखनऊ स्थित आवास में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सिविल अस्पताल ले जाया गया था। सिविल अस्पताल के चीफ चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर देवेश चंद्र पांडेय का कहना है कि उन्हें मृत अवस्था में ही अस्पताल लाया गया था। 

 

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प्रतीक यादव की मां साधना गुप्ता का साल 2022 में निधन हो चुका है। 2011 में प्रतीक का विवाह अपर्णा बिष्ट से हुआ था। अपर्णा अभी बीजेपी नेता हैं और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं।

 

गुरुवार को लखनऊ के बैकुंठ धाम श्मशान घाट में प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार हुआ। ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में अखिलेश यादव, शिवपाल यादव समेत परिवार के अन्य लोग, डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य समेत प्रदेशभर के नेताओं का तांता लगा था। नम आंखों से सभी ने प्रतीक यादव को अंतिम विदाई दी।