पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तमाम राजनीतिक दल तैयारियों में जुट गए हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और सरकार गुरु रविदास की 650वीं जयंती को इस पूरे साल मना रही है। भगवंत मान की सरकार ने श्री गुरु रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में पूरे प्रदेश में सालभर राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया था और यह कार्यक्रम 1 फरवरी से शुरू हो चुके हैं। इसी कड़ी में अब पंजाब के 13 हजार से ज्यादा गांवों में गुरु रविदास के जीवन से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई जाएगी।
यह फिल्म दिखाने के लिए पंजाब सरकार ने विशेष गाड़ियां तैयार की हैं जिन पर एलईडी लगी है। 30 मिनट की एक फिल्म तैयार की गई है। पंजाब के पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने बताया कि पंजाब सरकार श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व के मौके पर मोबाइल वैनों के माध्यम से हर गांव तक उनके जीवन और शिक्षाओं तक पहुंचा रही है।
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कौन थे गुरु रविदास?
गुरु रविदास 15वीं-16वीं सदी के महान संत, दार्शनिक और भक्ति आंदोलन के प्रमुख कवि थे। उन्हें रैदास भी कहा जाता है और उनका जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास सीर गोवर्धनपुर में हुआ था। उनका जन्म एक मोची के घर पर हुआ था जो दलित समुदाय से थे। उनके परिवार के लोग एक चर्मकार थे और वह भी आजीवन पारंपरिक काम में लगे रहे। गुरु रविदास ने जाति-पाति और लिंग भेद का विरोध कर सामाजिक समानता और आध्यात्मिक स्वतंत्रता का संदेश दिया। उनके कई पद सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं। उन्हें रविदासिया पंथ का संस्थापक माना जाता है। 2000 के दशक तक यह पंथ सिख धर्म के साथ जुड़ा रहा लेकिन इस दौरान हुई कुछ घटनाओं के बाद खुद को एक अलग धर्म के रूप में माना।
पंजाब में क्यों इतना अहम?
गुरु रविदास पंजाब की राजनीति में काफी अहम हैं। पंजाब में सबसे ज्यादा दलित आबादी है और इसमें सबसे बड़ा हिस्सा रविदासिया समुदाय का है। रविदासिया समुदाय का वर्चस्व दोआबा क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। पंजाब में दलित समुदाय की आबादी करीब 32 प्रतिशत है और इनमें सबसे ज्यादा संख्या रविदासिया समुदाय की है। गुरु रविदास की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने रविदास जयंती के कारण ही चुनाव की तारीख भी बदली थी। इस समुदाय सबसे प्रमुख डेरा 'डेरा सचखंड बल्लां' जिसके विश्व भर में 20 लाख अनुयायी हैं। इस डेरे में पीएम मोदी से लेकर राहुल गांधी , अरविंद केजरीवाल तक तमाम राजनेता जा चुके हैं।
दोआबा में प्रभाव
2011 की जनगणना के अनुसार, दोआबा रीजन में 52.08 लाख लोग रहते हैं। इनमें 19.48 लाख लोग दलित हैं और इनमें 11.88 लाख रविदास, 4.56 लाख वालमिकी और 3.04 लाख अन्य दलित समुदायों की संख्या है। रविदासिया समुदाय से आने वाले 19.48 लाख मतदाता किसी भी पार्टी को इस रीजन में लीड दिलाने के लिए काफी अहम हैं।
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सभी दलों की नजर
दोआबा बेल्ट के चारों जिलों में दलित समुदाय अच्छी खासी पकड़ रखता है और इस रीजन में विधानसभा की 23 सीटें हैं और इन में से 9 सीटें रिजर्व हैं। यह 23 सीटें पंजाब की सत्ता हासिल करने के लिए अहम हो सकती हैं। ऐसे में इस बार चुनाव से पहले तमाम पार्टियां इस समुदाय को अपने साथ लाने की कोशिश में जुट गई हैं। पीएम मोदी खुद गुरु रविदास की जयंती पर डेरा सचखंड पहुंचे थे। इसके अलावा आम आदमी पार्टी गुरु रविदास के जरिए इस समुदाय के लोगों में पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। अगले साल चुनाव में यह समुदाय किसी भी पार्टी की जीत और हार में अहम भूमिका निभा सकता है।


