बिहार में विधानसभा चुनाव के नतीजे 14 नवंबर को आए थे। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को इस चुनाव में करारी हार मिली थी। इस हार के बाद से तेजस्वी यादव राजनीति रूप से बेहद कम सक्रिय दिखे। बीच में वह छुट्टियां मनाने विदेश चले गए और अब लौटकर आए हैं। विदेश से लौटने के बाद शुक्रवार को तेजस्वी यादव ने पार्टी के सांसदों के साथ एक समीक्षा बैठक की। अब इस बैठक पर तंज कसते हुए उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने कहा है कि समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी खुद आत्ममंथन करने और जिम्मेदारी लेना जरूरी है। रोहिणी आचार्य ने बिना किसी का नाम लिए कहा है कि 'चिह्नित गिद्धों' को ठिकाने लगाने का साहस दिखाने के बाद ही किसी भी प्रकार की सार्थकता साबित होगी।

 

रोचक बात है कि चुनाव नतीजों के बाद रोहिणी आचार्य ने समीक्षा की बात कही थी और हार की जिम्मेदारी तय करने की बात भी उठाई थी। 16 नवंबर को उन्होंने एक पोस्ट में लिखा था कि उनके साथ बदसलूकी की गई और उन्हें घर से निकाल दिया गया। इस मामले पर आज तक लालू प्रसाद यादव या रबड़ी देवी की ओर से कोई बयान नहीं आया।

 

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इसी घटना के बाद रोहिणी आचार्य सिंगापुर अपने परिवार के पास लौट गई थीं। उसके बाद से कई मौकों पर वह ट्वीट करके ही तेजस्वी और उनकी टीम को आड़े हाथ लेती रही हैं।

 

 


निशाने पर कौन है?

 

तेज प्रताप हों या फिर रोहिणी आचार्य, सबके निशाने पर तेजस्वी के सलाहकार और करीबी संजय यादव हैं। तेज प्रताप इन्हीं संजय यादव को 'जयचंद' बताते हैं तो अब रोहिणी आचार्य ने बिना नाम लिए ही उन्हें 'गिद्ध' कहा है। दरअसल, इस मीटिंग का जो वीडियो सामने आया है, उसमें देखा जा सकता है कि पार्टी के वरिष्ठ सांसद मनोज झा, मीसा भारती, सुधाकर सिंह के साथ-साथ संजय यादव भी बैठे हैं। संजय यादव राज्यसभा सांसद हैं और तेजस्वी के करीबी भी हैं, ऐसे में उनको मीटिंग में तो होना ही थी। यही तस्वीरें देखकर रोहिणी आचार्य भड़क गई हैं।

 

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अब उन्होंने अपने X हैंडल पर लिखा है, 'समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी 'खुद' आत्ममंथन करने और जिम्मेदारी लेने की है , अपने इर्द-गिर्द कब्ज़ा जमाए बैठे चिह्नित 'गिद्धों' को ठिकाने लगाने का साहस दिखाने के बाद ही किसी भी प्रकार की समीक्षा की सार्थकता साबित होगी, बाकी तो ये जो पब्लिक है न , वह सब जानती-समझती ही है।'

चुनाव में क्या हुआ था?

 

लेफ्ट, कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी के साथ RJD ने महागठबंधन बनाया था। इस महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव को सीएम कैंडिडेट भी घोषित किया गया था। इस गठबंधन को उम्मीद थी कि वह नीतीश कुमार को सत्ता से बाहर कर पाएगा और तेजस्वी इस बार मुख्यमंत्री बन जाएंगे। हालांकि, नतीजे आए तो महागठबंधन के पैरों तले जमीन खिसक गई। RJD सिर्फ 25 सीटें जीत पाई और पूरे गठबंधन को सिर्फ 35 सीटों पर ही जीत मिली। वहीं, 200 से ज्यादा सीटें जीतकर NDA ने एक बार फिर से सरकार बना ली।