महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) छोड़ने के महज एक दिन बाद वरिष्ठ नेता सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति (MLC) निर्विरोध चुन लिए गए। उनके निर्विरोध निर्वाचन ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इसे शिंदे गुट की बड़ी राजनीतिक सफलता और उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
सचिन अहीर मंगलवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए थे। उसी दिन उन्होंने उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया और बुधवार को बिना किसी मुकाबले के इस पद पर निर्वाचित हो गए। महाविकास अघाड़ी (MVA) के उम्मीदवार जेएम अभ्यंकर ने अंतिम समय में अपना नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद अहीर का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया। हालांकि, नामांकन वापस लेने की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है।
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MVA उम्मीदवार ने वापस लिया नामांकन
MLC चुनाव में महाविकास अघाड़ी की ओर से जेएम अभ्यंकर मैदान में थे। संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल के अनुरोध के बाद अभ्यंकर ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद सचिन अहीर निर्विरोध उपसभापति चुन लिए गए। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब उद्धव ठाकरे की पार्टी पहले ही अपने छह सांसदों के शिंदे गुट में जाने से दबाव में है। ऐसे में अहीर का पार्टी छोड़ना और तुरंत बड़ा संवैधानिक पद मिलना उद्धव गुट के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
सचिन अहीर का राजनीतिक करियर
सचिन अहीर मुंबई की वर्ली सीट से विधायक रह चुके हैं। लंबे समय तक उन्हें आदित्य ठाकरे के सबसे करीबी नेताओं में गिना जाता था। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। इसके बाद वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में शामिल हुए, फिर अविभाजित शिवसेना का हिस्सा बने। अब उन्होंने एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया है।


