संजय सिंह, पटना: बिहार की राजनीति में 7 मई को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली NDA सरकार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रही है। जिसका शपथ ग्रहण समारोह पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में होने वाला है। यह शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ मंत्रियों की नियुक्ति नहीं, बल्कि NDA की ताकत का प्रदर्शन भी होगा। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह खुद मौजूद रहेंगे।

 

लंबे समय से इस बदलाव का इंतजार किया जा रहा था, जो अब पूरा होने जा रहा है। आने वाले चुनावों को देखते हुए इस नई टीम को बहुत सोच-समझकर चुना गया है। सरकार की कोशिश है कि समाज के हर वर्ग और हर इलाके के लोगों को मंत्रिमंडल में जगह दी जाए ताकि एक मजबूत और संतुलित टीम तैयार हो सके।

 

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JDU ने पुराने खिलाड़ियों पर जताया भरोसा

नीतीश कुमार की पार्टी JDU ने अपनी टीम में अनुभव को सबसे ऊपर रखा है। पार्टी ने उन पुराने और भरोसेमंद नेताओं को फिर से मौका देने का मन बनाया है जो जनता के बीच पकड़ रखते हैं। संभावित नामों में श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेसी सिंह और मदन सहनी जैसे पुराने चेहरे शामिल हैं। साथ ही, समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने के लिए शीला मंडल, रत्नेश सदा और जमा खां जैसे नेताओं को भी मंत्री बनाया जा सकता है।

BJP अनुभव के साथ युवाओं को मौका देगी

BJP इस बार एक नई और पुरानी पीढ़ी का मेल पेश करने वाली है। जहां एक तरफ मंगल पांडेय और रामकृपाल यादव जैसे अनुभवी नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, वहीं दूसरी तरफ श्रेयसी सिंह और लखेंद्र पासवान जैसे नए और युवा चेहरों को भी सरकार में शामिल किया जा सकता है। BJP की कोशिश है कि पिछड़ा वर्ग, दलित और युवाओं को यह संदेश दिया जाए कि पार्टी सबको साथ लेकर चल रही है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के साथ मिलकर यह नई टीम सरकार को नई ऊर्जा देने का काम करेगी।

 

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छोटे सहयोगियों को भी मिला सम्मान

एनडीए इस बार अपने छोटे साथी दलों को भी पूरा मान-सम्मान दे रहा है। चिराग पासवान की पार्टी (LJP-R) से संजय सिंह और संजय पासवान के नाम चर्चा में हैं। वहीं, जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन का मंत्री बनना लगभग तय है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से भी दीपक प्रकाश को जगह मिल सकती है। इस कदम से एनडीए महादलित और पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक को मजबूती से अपने पाले में रखना चाहता है। गांधी मैदान में शपथ ग्रहण के लिए भव्य तैयारियां की गई हैं, जो बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगी।