झारखंड के चतरा जिले के घने जंगलों में एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ है, जहां रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे ने न केवल एक गंभीर मरीज की जान ले ली, बल्कि उसके साथ मौजूद परिवार और मेडिकल टीम के कुल सात लोगों की जिंदगी भी खत्म कर दी। इस परिवार के बचे लोगों का कहना है कि जमीन बेचकर पैसे जमा किए थे लेकिन अब पूरा परिवार ही खत्म हो गया।
संजय कुमार की उम्र मात्र 41 वर्ष थी जब वे एक हादसे में 63 प्रतिशत तक जल गए थे। उनकी हालत बेहद गंभीर थी, इसलिए उनके परिवार ने अपनी पूरी जमा-पूंजी जोड़कर 8 लाख रुपये जुटाए ताकि उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची से दिल्ली ले जाया जा सके। बदकिस्मती से चतरा के जंगलों के ऊपर उड़ते समय बीचक्राफ्ट किंग एयर C-90 विमान अचानक क्रैश हो गया।
इस हादसे में संजय कुमार और उनकी पत्नी अर्चना देवी समेत विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में उनके एक रिश्तेदार, डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता, पैरामेडिक सचिन और दोनों पायलट भी शामिल थे।
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पढ़ाई के लिए बेची थी जमीन
चतरा सदर अस्पताल के बाहर मौजूद संजय के परिजन का रो-रोकर बुरा हाल था। उनके एक रिश्तेदार ने सवाल उठाया कि अगर रांची में ही इलाज की बेहतर सुविधा होती, तो उन्हें दिल्ली जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। इस हादसे ने डॉक्टर विकास के पिता बजरंग प्रसाद को भी कभी न भरने वाला जख्म दिया है। उन्होंने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी खेती की जमीन तक बेच दी थी और अब डॉक्टर विकास अपने पीछे सात साल का मासूम बेटा छोड़ गए हैं।
जब यह विमान चतरा के जंगलों में गिरा, तो तेज धमाके और आग की रोशनी देखकर पास के गांवों के लोग सबसे पहले मदद के लिए दौड़े। ग्रामीणों ने करीब 4 किलोमीटर का दुर्गम पैदल रास्ता तय किया और रात भर की मेहनत के बाद मलबे से शवों को बाहर निकाला। रेडबर्ड एयरवेज की ओर से संचालित इस विमान ने शाम 7:11 बजे रांची से उड़ान भरी थी लेकिन करीब 20 मिनट बाद ही इसका संपर्क कंट्रोल रूम से टूट गया और यह रडार से गायब हो गया।
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विमान सुरक्षा पर भी खड़े हुए सवाल
यह घटना भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस हादसे से कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र के बारामती में भी एक विमान दुर्घटना हुई थी। हालांकि रांची एयरपोर्ट के निर्देशक का कहना है कि खराब मौसम इस हादसे की एक वजह हो सकता है लेकिन असली कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल पाएगा। डीजीसीए अब इस बात की जांच कर रहे है कि क्या यह हादसा किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ या मौसम की मार के कारण।
