पश्चिम बंगाल में आदिवासियों के उत्पीड़न के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन चल रहा है। इस बीच प्रदर्शन कर रहे जनजातीय समुदाय के लोगों पर बंगाल पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। गुरुवार को उत्तर बंगाल के ब्रांच सेक्रेटेरिएट उत्तरकन्या की ओर मार्च कर रहे 1,000 आदिवासियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज किया।
पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की थी, जिसके बाद लोगों ने बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश। इसी दौरान पुलिसकर्मियों पर पत्थर और बोतलें फेंकी गईं। पुलिस की इस कार्रवाई से आदिवासी समाज का गुस्सा फूट पड़ा है।
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बीजेपी विधायक सिखा भी प्रदर्शन में शामिल
आदिवासियों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए बीजेपी ने ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोला है। दरअसल, जनजाति सुरक्षा मंच नाम के एक आदिवासी संगठन ने मार्च का आयोजन किया था। इस प्रदर्शन में डाबग्राम-फुलबाड़ी की बीजेपी विधायक सिखा चटर्जी भी शामिल थीं।
10 पुलिसवाले घायल
गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे, रैली जलपाई मोड़ से शुरू हुई और उत्तरकन्या की ओर बढ़ी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बड़ी संख्या में सिलीगुड़ी पुलिस तिनबत्ती मोड़ पर तैनात की गई थी। इसके बाद प्रदर्शनकारी एक बैरिकेड हटाने में कामयाब रहे और आगे बढ़ गए।
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प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पानी की बोतलें और पत्थर फेंके। पुलिस ने जल्द ही वॉटर कैनन और लाठियों का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस झड़प में कम से कम 10 पुलिसवाले घायल हुए हैं, जबकि 16 लोगों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
मामले की जड़ क्या है?
बता दें कि दिसंबर में दार्जिलिंग के फांसीदेवा विधानसभा क्षेत्र के झमकलाल जोटे इलाके में एक गर्भवती आदिवासी महिला पर जमीन के झगड़े को लेकर हमला हुआ था। हमले में महिला को गंभीर चोटें आईं थी और बाद में महिला ने अपना बच्चा खो दिया। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करने, आरोपियों को कड़ी सजा देने और पीड़ित परिवार को सही मुआवजा देने की मांग की है।
