बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद अक्सर लोगों की जान बचाने के लिए चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने एक ऐसी मांग उठाई है जिसने पूरे देश के माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। गाजियाबाद की दिल दहला देने वाली घटना ने सोनू सूद को अंदर तक झकझोर दिया, जिसके बाद उन्होंने बेहद भावुक होकर सोशल मीडिया पर संदेश जारी किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज के दौर में बच्चों को स्मार्टफोन या सोशल मीडिया की स्क्रीन नहीं, बल्कि अपने माता-पिता के साथ का और उनके मार्गदर्शन की सबसे ज्यादा जरूरत है। सोनू सूद का मानना है कि मोबाइल की यह लत किसी महामारी से कम नहीं है, जो चुपचाप हमारे बच्चों के बचपन और उनकी मासूमियत को निगल रही है।
उन्होंने सरकार और समाज से अपील की है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग को पूरी तरह से बैन कर देना चाहिए, क्योंकि शिक्षा के नाम पर बच्चों के हाथ में थमाया गया मोबाइल उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए जहर साबित हो रहा है। सोनू के अनुसार, यह घटना सिर्फ एक सुसाइड नहीं बल्कि एक 'डिजिटल मर्डर' है, जहां इंटरनेट के खतरनाक एल्गोरिदम ने मासूम बच्चियों के दिमाग को इस कदर काबू कर लिया कि उन्हें मौत आसान लगने लगी।
यह भी पढ़ें: बिहार में डूबने से हो रहीं सबसे ज्यादा मौतें, डराते हैं आंकड़े
क्या हुआ था गाजियाबाद में?
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 'भारत सिटी' सोसाइटी में हुआ यह हादसा। बुधवार (4 फरवरी 2026) की रात को, जब पूरा परिवार सो रहा था, तब तीन सगी बहनों ने सोसाइटी की 9वीं मंजिल की बालकनी से एक साथ छलांग लगा दी। मौके पर ही तीनों की मौत हो गई। एक का नाम
निशिका था जो 16 वर्ष की थी और दूसरी का नाम प्राची जिसकी आयु 14 वर्ष थी। इनमें सबसे छोटी थी पाखी जो केवल 12 वर्ष की थीं।

यह भी पढ़ें: रूस से तेल खरीदेंगे या नहीं, ट्रंप के दावे पर भारत ने बता दिया प्लान
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि ये तीनों बहनें किसी मानसिक बीमारी से नहीं, बल्कि 'डिजिटल एडिक्शन' से जूझ रही थीं। वे तीनों एक कोरियन ऑनलाइन टास्क-आधारित गेम और कोरियन कल्चर के प्रति इतनी जुनूनी हो चुकी थीं कि उन्हें असल जिंदगी से ज्यादा लगाव उस मोबाइल की स्क्रीन से था। जब उनके पिता ने उनकी इस बढ़ती लत को देखा और उन्हें सुधारने के लिए उनके मोबाइल फोन छीन लिए, तो वे इस बात को बर्दाश्त नहीं कर पाईं।
मरने से पहले उन्होंने एक डायरी छोड़ी, जिसे उन्होंने अपनी 'True Life Story' का नाम दिया था। उन 8-9 पन्नों में उन्होंने अपनी तड़प लिखी थी कि वे अपनी उस डिजिटल दुनिया के बिना नहीं जी सकतीं। उन्होंने अपने माता-पिता के लिए लिखा कि 'आपने हमें उन चीजों से दूर किया जिन्हें हम चाहते थे, अब आप हमारे बिना रहिए।'
यह सुसाइड नोट इस बात का गवाह है कि कैसे एक मोबाइल फोन और उसमें मौजूद गेम्स बच्चों के दिमाग को पूरी तरह 'हाईजैक' कर सकते हैं, जिससे उन्हें अपनों की डांट भी दुश्मनी लगने लगती है।
