अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है। लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को स्पष्ट कहा कि देश की 1.4 अरब जनता की ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भारत किसी भी दबाव में नहीं आएगा और तेल खरीद के फैसले बाजार की स्थिति और राष्ट्रीय हित के आधार पर लिए जाएंगे।
ट्रंप ने इस हफ्ते अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका तथा वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदने पर सहमति दिखाई है। ट्रंप ने लिखा, 'यह यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में मदद करेगा, जहां हर हफ्ते हजारों लोग मर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।
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रूस ने दी प्रतिक्रिया
ट्रंप के इस दावे के बाद रूस ने भी प्रतिक्रिया दी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि उन्हें नई दिल्ली से इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने कहा, 'हम अमेरिका-भारत संबंधों का सम्मान करते हैं, लेकिन रूस-भारत की रणनीतिक साझेदारी हमारे लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है। हम दिल्ली के साथ संबंधों को और मजबूत करेंगे।'
ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्रोतों को लेकर सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।' उन्होंने आगे कहा, 'हम बाजार की वास्तविक स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल के अनुसार ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाते हैं। भारत के सभी फैसले इसी को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं और आगे भी लिए जाएंगे।'
वेनेजुएला से तेल खरीदने को तैयार
जायसवाल ने वेनेजुएला के तेल पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'भारत का वेनेजुएला के साथ पुराना संबंध रहा है। हम वेनेजुएला या अन्य जगहों से तेल खरीदने को लेकर ओपन हैं, लेकिन यह व्यावसायिक रूप से लाभदायक होना चाहिए।' भारत ने पहले 2019-20 तक वेनेजुएला से तेल खरीदा था, फिर 2023-24 में फिर शुरू किया, लेकिन प्रतिबंधों के कारण रुक गया।
अंतिम चरण में समझौता
प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार समझौते की पुष्टि की है, लेकिन रूसी तेल बंद करने पर कोई टिप्पणी नहीं की। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने भी कहा कि समझौता अंतिम रूप ले रहा है और जल्द ही संयुक्त बयान जारी होगा। समझौते से भारतीय सामानों पर टैरिफ कम होने से निर्यात को फायदा होगा।
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ऊर्जा जरूरत को प्राथमिकता
यह घटनाक्रम दिखाता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है। रूस से सस्ता तेल मिलने के कारण भारत ने पिछले सालों में उससे काफी खरीदारी की है। अब अमेरिका दबाव बना रहा है, लेकिन भारत ने साफ कहा है कि फैसले राष्ट्रीय हित से होंगे। रूस ने भी कहा कि भारत स्वतंत्र रूप से फैसला कर सकता है।
यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा व्यापार में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। भारत न तो किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर होना चाहता है और न ही दबाव में आना। ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों को संतुलित रखना भारत की रणनीति है।