गुजरात के सूरत में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। सूरत के ताड़केश्वर में नई बनी पानी की टंकी उद्घाटन से पहले ही जमीदोज़ हो गई। यह ताजा मामला सरकारी सिस्टम की पोल खोल रहा है, साथ ही यह निर्माण कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार की तरफ भी इशारा कर रहा है। 

 

इस मामले ने सूरत के साथ ही पूरे गुजरात में तूल पकड़ लिया है और सोशल मीडिया पर इसको लेकर चर्चाएं हो रही हैं। इस सिलसिले में पुलिस ने बुधवार को दो सरकारी अधिकारियों समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

कौन-कौन हुए गिरफ्तार

पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें 61 साल का कॉन्ट्रैक्टर जयंती पटेल है जो जयंती सुपर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, मेहसाणा का मालिक है। इसके अलावा इसमें शामिल बाबू पटेल, 32 साल के जैस्मीन और 35 साल के धवल को भी गिरफ्तार किया गया है।

 

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अहमदाबाद की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी मार्स प्लानिंग एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारी, सुपरविजन हेड बाबू मणि पटेल और साइट सुपरवाइजर जिगर प्रजापति को भी गिरफ्तार किया गया।

अधिकारी की भी गिरफ्तारी

इस भ्रष्टाचार में शामिल गुजरात वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (GWSSB) के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अंकित गरासिया और डिप्टी इंजीनियर जय चौधरी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं, पुलिस जांच में शामिल दूसरे लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है।

कौन कर रहा है जांच?

सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच सरदार वल्लभभाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सूरत और गुजरात इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (GERI), वडोदरा के इंजीनियरिंग एक्सपर्ट्स की एक टीम ने कर रही है। जांच टीम टंकी के गिरने की वजह का पता लगाने के लिए मौके पर भी पहुंची। सूरत के एसपी ने कहा, 'SVNIT और GERI की टेक्निकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की जांच करेगी। इसमें इस्तेमाल किए गए मटीरियल की टेस्टिंग और दूसरी टेक्निकल डिटेल्स को वेरिफाई किया जाएगा।'

 

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पुलिस का कहना है कि आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। बाद में सबूत सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

टंकी की कीमत कितनी थी?

इस टंकी का ओवरहेड वॉटर टैंक की कैपेसिटी 11 लाख लीटर थी। टेस्टिंग के दौरान, टंकी में लगभग 9 लाख लीटर पानी भरा गया था। यह टैंक 14 गांवों तक पानी की पहुंच सुनिश्चित करने वाला था। टंकी के जरिए वॉटर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के लिए 21 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का हिस्सा था। टैंक की लागत 1 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 83 लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके थे।