देश की बड़ी बीपीओ कंपनी टीसीएस (TCS) के नासिक ऑफिस में यौन उत्पीड़न और बलात्कार के गंभीर आरोपों में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। पुलिस को शुरुआती टिप-ऑफ मिलने के बाद छह महिला पुलिस अधिकारी 40 दिन तक कंपनी के ऑफिस में अंडरकवर काम करती रहीं। इस दौरान उन्होंने आरोपियों के व्यवहार पर नजर रखी।
पुलिस ने मार्च 26 से अप्रैल 3 के बीच आठ एफआईआर दर्ज की हैं। पहले शिकायतकर्ता महिला कर्मचारी ने देवलाली पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दी थी। उसने आरोप लगाया कि उसके एक सीनियर ने उसके साथ बलात्कार किया। जांच के दौरान आठ अन्य कर्मचारियों, जिनमें एक पुरुष कर्मचारी भी शामिल है, ने मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराईं।
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7 आरोपी नौकरी से निकाले गए
टीसीएस प्रबंधन ने आठ में से सात आरोपियों को नौकरी से निकाल दिया है। आठवां आरोपी कंपनी का एचआर मैनेजर है, जो अभी पुलिस की रिमांड में है। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि एचआर मैनेजर पर आरोप है कि जब एक महिला कर्मचारी ने ईमेल करके शिकायत की तो उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। सात कर्मचारियों को 7 अप्रैल को गिरफ्तार किए जाने के बाद उन्हें निकाला गया।
पुलिस ने की अंडरकवर कार्रवाई
नासिक शहर के पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक ने बताया कि फरवरी के मध्य में ही पुलिस को छह कर्मचारियों के गलत कामों की टिप मिली थी। इसके बाद पुलिस कमिश्नर के मार्गदर्शन में एक पूरी योजना बनाई गई।
संदीप मिटके, सहायक पुलिस आयुक्त और एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) के प्रमुख ने कहा, 'यह एक अच्छी तरह से तैयार की गई योजना थी।' छह महिला पुलिसकर्मी ऑफिस में नॉर्मल कर्मचारी बनकर काम करती रहीं। वे मीटिंग्स के दौरान और महिला कर्मचारियों के वर्कस्टेशन पर आरोपियों के व्यवहार पर नजर रखती थीं।
हर दिन काम के बाद ये अधिकारी अपने सीनियर्स को रिपोर्ट देती थीं। सारी जानकारी पुलिस कमिश्नर तक भी पहुंचाई जाती थी। अंडरकवर टीम की रिपोर्ट से टिप-ऑफ की पुष्टि हुई।
आरोपियों पर मामला दर्ज
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया गया है। देवलाली पुलिस स्टेशन में धारा 69 (बलात्कार), 75 (यौन उत्पीड़न) और 299 (धार्मिक भावनाएं भड़काना) लगाई गई हैं। मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में धारा 78 (स्टॉकिंग), 79 (अश्लील इशारे से शील भंग) और 299 भी शामिल हैं।
पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक ने कहा कि एसआईटी इस बात की भी जांच कर रही है कि कंपनी ने यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर आंतरिक स्तर पर क्या कार्रवाई की। कंपनी का कहना है कि उनके पास POSH ऐक्ट के तहत इंटरनल कम्प्लेंट्स कमिटी (ICC) है लेकिन पीड़ित कर्मचारियों ने ICC के पास कोई शिकायत नहीं की थी।
टीसीएस ने क्या कहा?
टीसीएस ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि कंपनी उत्पीड़न और जबरदस्ती बर्दाश्त नहीं करती। कंपनी ने कहा, 'हमारे कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई सबसे महत्वपूर्ण है। मामले की जानकारी मिलते ही हमने तुरंत कार्रवाई की। जिन कर्मचारियों की जांच चल रही है, उन्हें जांच पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया गया है। हम पुलिस के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। आगे की कार्रवाई जांच के नतीजे पर निर्भर करेगी।'
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यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह एक बड़ी आईटी कंपनी में हुआ है जहां हजारों युवा, खासकर महिलाएं काम करती हैं। पुलिस अब यह भी देख रही है कि क्या कंपनी के अंदर शिकायत का सही तरीके से निपटारा नहीं हुआ।
अभी तक आठ एफआईआर दर्ज हैं और जांच जारी है। एसआईटी पूरी गहराई से मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि अगर और कोई आरोपी या लापरवाही सामने आएगी तो उसकी भी जांच होगी।
