बिहार के रोहतास जिले के पास एक गांव में नाबालिग लड़की की शादी कराई जा रही थी। उसी दौरान पुलिस प्रशासन लड़की की शादी रुकवाने पहुंच गया। जहां लड़की के फेरे होने से ठीक पहले पुलिस ने उसका आधार कार्ड मांगा, जिसके मुताबिक लड़की की उम्र 17 साल 8 महीने थी। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने लड़की के परिवार को समझा-बुझाकर शादी रुकवा दी।

 

यह घटना सासाराम शहर के पास राजपुर थाना क्षेत्र के मलावा गांव की है, जहां 28 अप्रैल को यह मामला सामने आया। पुलिस अधिकारियों को नाबालिग के विवाह की जानकारी बाल संरक्षण टीम ने दी थी। इस टीम के अधिकारी  भी पुलिस अधिकारियों के साथ शादी रुकवाने गए थे। साथ ही बीडीओ अधिकारी (Block Development Officer) ने भी लड़की के परिवार को समझाया कि बाल विवाह कराना अपराध है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बाल संरक्षण टीम ने 11 अप्रैल को ही इस बाल विवाह की जानकारी दे दी थी।

 

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 पहले भी हुई थी शादी रुकवाने की थी कोशिश

11 अप्रैल को बाल संरक्षण टीम ने थाने में बाल विवाह को लेकर शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस अधिकारियों ने लड़की के परिवार को थाने बुलाया था। वहां पूरे परिवार को समझाया गया कि बाल विवाह कराना कानूनन अपराध है। 18 साल से पहले बेटी की शादी कराने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इतना समझाने के बाद भी लड़की के परिवार वाले नहीं माने और 28 अप्रैल को गांव में ही शादी करा रहे थे।

 

पुलिस अधिकारियों ने विवाह रुकवाने का एक्शन बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2010 के तहत लिया। इस अधिनियम में साफ तौर पर लिखा है कि 18 साल से कम उम्र में लड़की का विवाह नहीं कराया जा सकता है।

 

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परिजन हुए नाराज

पुलिस अधिकारियों के शादी रुकवाने पर परिजन नाराज हो गए और उन्होंने पुलिस का विरोध भी किया। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने साफ तौर पर समझाया कि अगर आगे भी बाल विवाह कराया गया, तो परिजन को सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।