महाराष्ट्र में इस समय जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव चल रहे हैं। इसी बीच एक खबर सामने आई कि 7 फरवरी शनिवार देर रात मोहोल इलाके में सड़क किनारे बने एक ढाबे के पास दो सीलबंद EVM कंट्रोल यूनिट लावारिस हालत में पड़ी मिलीं। जानकारी मिलते ही स्थानीय नेता और राजनीतिक कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और वहां विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। इस घटना की खबर फैलते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
मामला सामने आते ही राज्य चुनाव आयोग ने तुरंत इसकी जांच शुरू कर दी और साथ ही पूरे मामले पर अपनी सफाई भी दी।
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क्या है पूरा मामला?
शनिवार को जिले में मतदान होना था। राज्य चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन ने मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न करा लिया। रात करीब 11 बजे यह खबर आई कि सड़क किनारे एक ढाबे के पास सीलबंद EVM मशीन पड़ा हुआ मिला है। चुनाव अधिकारियों और पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। जांच के बाद अधिकारियों ने मामले में स्पष्टीकरण भी दिया।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और शिवसेना के स्थानीय नेताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि चुनाव में गड़बड़ी हुई है। साथ ही यह मांग की है कि दोबारा मतदान करवाया जाए।
रिजर्व मशीनें
प्रशासन के अनुसार, ये दोनों मशीनें 'रिजर्व' थीं। इनका इस्तेमाल वोटिंग के लिए नहीं किया गया था बल्कि इन्हें किसी तकनीकी खराबी की स्थिति के लिए बैकअप के तौर पर रखा गया था। साथ ही जिला प्रशासन ने यह आश्वासन भी दिया कि जिन मशीनों में वोट दर्ज किए गए थे उन्हें रात करीब 10:30 बजे तक ही सुरक्षित 'स्ट्रांग रूम' में जमा करा दिया गया था।
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मौके पर ही तुरंत पहुंचकर अधिकरियों ने पंचनामा कर मशीनों को दोबारा सील किया गया और सरकारी गोदाम में भेज दिया गया है।
प्रशासन का पक्ष
चुनाव आयोग और जिला कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि मतदान में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। हालांकि, यह जांच अभी जारी है कि सरकारी नियमों के खिलाफ ये मशीनें आखिर ढाबे तक कैसे पहुंचीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
