भारतीय जनता पार्टी ने पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर फिर से एनडीए की सरकार बनाई थी। इन चुनावों में कांग्रेस समेत पूरे महागठबंधम को बड़ा झटका लगा था लेकिन इन चुनावों के कुछ ही महीने बाद पटना यूनिवर्सिटी में हुए छात्रसंघ चुनाव में बीजेपी की विचारधार की समर्थक  अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की हार हुई है। इसके साथ ही झारखंड निकाय चुनाव में भी बीजेपी को झटका लगा है। जानकारों का मानना है कि इसके पीछे यूजीसी के नए विवादित नियम हो सकते हैं। 

 

झारखंड में हाल ही में हुए निकाय चुनाव में बीजेपी की बुरी तरह हार हुई है। जिन इलाकों में पार्टी मजबूत थी उन इलाकों में भी पार्टी के समर्थक उम्मीदवारों की हार हो गई है। कुल 9 नगर निगमों में चुनाव हुए थे लेकिन बीजेपी को सिर्फ 3 पर ही जीत मिली। बीजेपी सिर्फ रांची, आदित्यपुर और मेदिनीनगर में ही जीत दर्ज कर पाई। 

 

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पटना यूनिवर्सिटी में ABVP की हार

पटना यूनिवर्सिटी में बीजेपी और संघ की विचारधारा की समर्थक ABVP की हार हो गई है। कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया के शांतनु शेखर ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर ली है। ABVP को अध्यक्ष पद पर करारी हार का सामना करना पड़ा। 1980 के बाद एनएसयूआई के लिए यह पहली जीत है। ABVP भले ही प्रत्यक्ष रूप से बीजेपी का संगठन नहीं है लेकिन इस हार को बीजेपी के लिए झटका माना जा रहा है। 

क्या UGC नियमों के कारण हुई हार?

हाल ही में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026' नियम लागू किए थे। इन नियमों पर जमकर विवाद हुआ था। इन नियमों को जनरल कैटेगरी के लोगों के लिए खतरनाक बताया गया। बिहार की पटना यूनिवर्सिटी और झारखंड निकाय चुनाव में हुई हार को इन्हीं से जोड़कर देखा जा रहा है। यह चुनाव UGC का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद हुए हैं। 

वोटिंग हुई कम

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झारखंड में नाराज बीजेपी वोटर वोट करने घर से ही नहीं निकले। जनरव कास्ट के वोटर्स को बीजेपी का ही वोटर माना जाता है। इन्हीं जातियों में नए यूजीसी नियमों को लेकर विरोध हुआ था। इस पर बीजेपी ने अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है। पटना यूनिवर्सिटी में हुए छात्रसंघ चुनाव में 37.84 प्रतिशत वोटिंग हुई। जो पिछली बार 45.25 प्रतिशत से 7.41 प्रतिशत कम थी। जब रिजल्ट आए तो ABVP के उम्मीदवार अध्यक्ष पद पर चुनाव हार गए।

 

इसी तरह झारखंड में 9 नगर निगमों में हुए चुनावों में भी वोटिंग प्रतिशत कम रहा। हजारीबाग को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता था लेकिन यहां पिथले बार की तुलना में 5 प्रतिशत तक कम वोट पड़े। नतीजे बीजेपी के खिलाफ थे और पार्टी सिर्फ 3 मेयर पदों पर ही जीत दर्ज कर पाए।  

 

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हार के कारण

कम वोटिंग के अलावा बीजेपी कार्यकर्ताओं का घर बैठ जाना पार्टी के लिए हानिकारक रहा। पटना यूनिवर्सिटी में भी एबीवीपी के कार्यकर्ताओं में कोई उत्साह नहीं दिखा। जिन डिपार्टमेंट्स में एबीवीपी को जमकर वोट मिलते थे उनमें इस बार वोटिंग ही कम हुई। इसे एबीवीपी की हार का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। झारखंड में बीजेपी के सीनियर नेताओं की कैंपेन के बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। लोग यूजीसी के नियमों को लेकर चर्चा करते दिखे।