उत्तर प्रदेश में इन दिनों संतों और योगी सरकार के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कुछ दिन पहले संत अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया था कि प्रदेश में गौहत्या हो रही है। वहीं सरकार की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है।
प्रदेश के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने शनिवार को संत अविमुक्तेश्वरानंद के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वे गौहत्या को लेकर झूठे बयान दे रहे हैं। धर्मपाल सिंह ने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश में गौहत्या पूरी तरह गैरकानूनी है और यह एक गंभीर अपराध है।
यह भी पढ़ें: बिहार में नाबालिग लड़कियों का हो रहा था देह व्यापार, UPI से लेते थे पेमेंट
क्या है पूरा विवाद
योगी सरकार और संत अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते कुछ दिनों से संत अविमुक्तेश्वरानंद लगातार सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ अपने हिंदू होने का प्रमाण दें और इसके लिए प्रदेश में पूरी तरह गौहत्या बंद कराएं। साथ ही संत अविमुक्तेश्वरानंद का दावा है कि देश से जो मांस निर्यात होता है, उसमें उत्तर प्रदेश से भी गोमांस निर्यात किया जाता है। उनका कहना है कि पूरे देश से निर्यात होने वाले मांस का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से आता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में गौहत्या हो रही है।
उन्होंने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि योगी सरकार के पास 40 दिन का समय है। अगर 10 से 11 दिनों के भीतर प्रदेश में गौहत्या पूरी तरह बंद नहीं हुई तो सभी संत मिलकर आंदोलन करेंगे।
यह भी पढ़ें: क्या ब्रिटेन में भारतीय करवा रहे भ्रूण हत्या? क्या कहती है रिपोर्ट?
इन आरोपों को खारिज करते हुए पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि शायद संत अविमुक्तेश्वरानंद को यह जानकारी नहीं है कि उत्तर प्रदेश में गौहत्या और गोमांस की बिक्री पहले से ही प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के सत्ता में आते ही सबसे पहले अवैध बूचड़खानों को बंद कराया गया था। धर्मपाल सिंह ने बताया कि प्रदेश से केवल सुअर, भैंस और बकरे का मांस ही निर्यात होता है और वह भी नियमों के तहत किया जाता है। गोवंशीय पशुओं की देखभाल और संरक्षण के लिए सरकार गोशालाओं का निर्माण करा रही है। पशुओं के उपचार और संरक्षण के लिए भी लगातार काम किया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता गोशालाओं को समृद्ध बनाकर गांवों का विकास करना है।
शंकराचार्य मानने से इनकार
पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने संत अविमुक्तेश्वरानंद के पद पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 'शंकराचार्य कोई सरकारी नियुक्ति या संवैधानिक पद नहीं है। यह मठों और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी ऐसे व्यक्ति को मान्यता नहीं देगी जो धार्मिक पद की आड़ में राजनीतिक सोच के साथ जनता के बीच भ्रम फैलाए'।
धर्मपाल सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार संत अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं मानती। उन्होंने यह भी कहा कि 'कानून तोड़ने की छूट किसी को नहीं है। प्रशासन का काम शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि किसी विवादित या धार्मिक दावे पर मुहर लगाना। गौहत्या के मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून तक लगाया गया है और कई पशु तस्कर जेल में हैं।'
