उत्‍तराखंड में चकराता के खरासी गांव से एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक परिवार के पांच भाइयों की शादी एक ही मंडप के नीचे हुई। खास बात यह है कि इस शादी में दूल्हे बारात लेकर नहीं गए बल्कि दूल्हनें खुद बारात लेकर दुल्हों के घर पहुंची। इस शादी को देखने के लिए इलाके के लोगों की भीड़ जुट गई। बताया जा रहा है कि यह सभी दूल्हे जौनसारी समाज के हैं और समाज की दोझोड़े परंपरा के तहत यह शादी की गई है। अब यह शादी पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। 


बता दें कि उत्तराखंड के जौनसार बावर में संयुक्त परिवार को बढ़ावा देने और विवाह में फिजूलखर्ची रोकने के लिए सामूहिक विवाह की अनूठी परंपरा है। इस परंपरा के तहत एक ही परिवार के विवाह योग्य कई भाईयों की शादी एक साथ होती है। यह परंपरा लंबे  समय से चली आ रही है और संयुक्त परिवार, एकता और समाज में एकता का प्रतीक मानी जाती है। 

 

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एक मंडप में हुई 5 भाईयों की शादी

उत्‍तराखंड में चकराता के खरासी गांव के नरेंद्र, प्रदीप, प्रीतम, अमित और राहुल पांचों भाई हैं। उन पांचों की शादी बुधवार 29 मई को आयोजित की गई। नरेंद्र का विवाह अन्‍नू से, प्रदीप का निक्‍की से, प्रीतम का पुनीता से, अमित का निर्मला से और राहुल की शादी आंचल के साथ हुई। सभी दुल्हनें बारात लेकर पहुंची और दूल्हे के घर पर शादी हुई। पूरा गांव इस जश्न में डूब गया था। 

जोजोड़ो परंपरा के तहत शादी

देहरादून में स्थित जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र अपनी समृद्ध पंरपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। एक तरफ पूरे देश में शादी पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं इस परिवार ने अपनी जनजाती की परंपरा को बनाए रखते हुए एक साथ परिवार के पांच बेटों की शादी की। इस परिवार के मुखिया दौलत सिंह हैं और उनके स्वर्गीय भाई बारू सिंह के बेटे की शादी की गई। परिवार के मुखिया दौलत सिंह ने कहा, 'हमारी ये परंपरा पहले से है। दुल्हन के साथ जोजोड़िए आते हैं। तीन भाइयों के पांच बेटों की पांच बहुएं आई हैं। एक बेटी की विदाई आज 30 अप्रैल को हो रही है। हमारा सामूहिक परिवार है।'

 

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बहन को किया विदा

परिवार के पांच बेटों की शादी 29 अप्रैल को की गई और इसके बाद एक बेटी की शादी की गई। बेटी की शादी बेटों की शादी के अगले ही दिन 30 अप्रैल को आयोजित की गई। जोझोड़ो शादी में दुल्हन 15-20 बारातियों के साथ दूल्हे के घर जाती है और इसके बाद दूल्हे के घर पर शादी की रस्में होती हैं। इसके अगले दिन दुल्हन के साथ आए बाराती यानी जोझोड़िए लौट जाते हैं। इसके कुछ दिन बाद दुल्हन अपने दूल्हे को लेकर मायके जाती है।