उत्तराखंड में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बड़ा झटका लगा है। उत्तराखंड में तीन निकायों के लिए 9 जून को हुए मतदान के नतीजे गुरूवार को घोषित हुए। इन तीन में से दो जगहों पर निर्दलीय उम्मीदवारों की जील हुई और सिर्फ एक सीट पर ही बीजेपी जीत पाई। आमतौर पर स्थानीय चुनाव में सत्तारूढ़ दल के जीतने का चलन रहा है लेकिन यहां उल्टा हो गया है। 

 

भारतीय जनता पार्टी ने आसानी से हार नहीं मानी। उन्होंने तीन बार वोटों की गिनती करवाई और जिस सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार की जीत हुई है उस सीट पर वह निर्दलीय ही चुनाव जीते हैं क्योंकि विरोधी उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया गया था। इन चुनावों के बाद अब बीजेपी बैकफुट पर नजर आ रही है। 

 

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तीन बार गिनती के बाद भी हारी बीजेपी

पाटी और गढ़ीनेगी दोनों नगर पंचायतों में मुकाबला कांटे का रहा। रिजल्ट आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने रिजल्ट को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद पार्टी ने पुनर्गणना की मांग की। पार्टी की मांग पर एक बार नहीं दो बार पुनर्गणना हुई लेकिन नतीजा नहीं बदला। 

इन क्षेत्रों का महत्व

पाटी नगर पंचायत चुनाव में मिली हार बीजेपी के लिए झटका माना जा रहा है। इस क्षेत्र में बीजेपी के संगठन की मजबूती मानी जाती है। इसके बावजूद बीजेपी इस इलाके में जीत दर्ज नहीं कर पाई। यहां से निर्दलीय उम्मीदवार नारायण लाल ने जीत दर्ज की है और वह मूल रूप से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। गढ़ीनेगी की बात करें तो यहां भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है। जनसंख्या के लिहाज से यह क्षेत्र काफी अहम माना जाता है। ऐसे में इस सीट पर हार मिलाना बीजेपी के लिए काफी निराशाजनक है। 

कांग्रेस का क्या हुआ?

कांग्रेस का कहना है कि टिहरी गढ़वाल में उनके समर्थन वाले उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया गया था। यहां नामांकन रद्द होने के कारण बीजेपी के उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए। ऐसे में इस सीट को भी बीजेपी की हार मान रहा है। सिर्फ तीन निकायों में हुए यह चुनाव राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बने हुए हैं क्योंकि इन्हें आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि उधमसिंह नगर और चंपावत में जीते निर्देलीय प्रत्याशी कांग्रेस समर्थित थे। कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह का कहना है कि जीत की ये शुरूआत बताती है कि 2027 की तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। 

 

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बीजेपी के लिए क्यों मुश्किल?

बीजेपी पिछले करीब 10 साल से राज्य में सत्ता में है। ऐेसे में पार्टी के सामने तीसरी बार लगातार सरकार बनाने की चुनौती होगी। उत्तराखंड में हर पांच साल बाद सरकार बदलने की परंपरा रही है लेकिन बीजेपी ने पिछली बार इस परंपरा को तोड़कर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। हालांकि, अब कई मुद्दों पर पार्टी बैकफुट पर नजर आ रही है। ऐसे में इन तीन सीटों पर हुए चुनाव के बाद पार्टी निराश है। बीजेपी के नेता सार्वजनिक मंचों पर कह रहे हैं कि यह कांग्रेस की जीत नहीं है, लेकिन पार्टी इस हार पर मंथन कर रही है। गौरतलब है कि उत्तराखंड में अगले साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होंगे और मार्च में अगली विधानसभा का गठन होगा।