संजय सिंह, पटना: बिहार के सीतामढ़ी जिले में बुधवार, 11 मार्च को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई। निगरानी विभाग की एक टीम ने कोर्ट परिसर के बाहर एक पंचायत मुखिया को 16 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। निगरानी विभाग ने भ्रष्ट मुखिया को फिल्मी अंदाज में बका।

 

बताया जा रहा है कि यह मामला नल-जल योजना के तहत पंप ऑपरेटरों और वार्ड सदस्यों को मानदेय देने से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, पंचायत के कई पंप ऑपरेटरों को करीब दो साल से पेमेंट नहीं मिला था। आरोप है कि पेमेंट देने के बदले में ग्राम प्रधान ने 16 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।

 

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दो साल से लंबित था मानदेय

जानकारी के मुताबिक, पंप ऑपरेटरों को सरकारी नियमों के तहत लगभग दो हजार रुपये महीने का मानदेय दिया जाता है। यह रकम उन्हें पानी की सप्लाई सिस्टम को ठीक से चलाने के लिए दी जाती है। लेकिन शिकायत करने वाले वार्ड सदस्य और पंप ऑपरेटर अजय कुमार पासवान ने आरोप लगाया कि पंचायत ने यह पेमेंट लंबे समय से रोक रखी थी।

 

उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपने बकाया पैसे की मांग की तो पंचायत के मुखिया ने भुगतान जारी करने के बदले 16 हजार रुपये की मांग कर दी। इससे परेशान होकर उन्होंने मामले को पंचायत स्तर पर सुलझाने की कोशिश की लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

 

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शिकायत के बाद निगरानी विभाग ने बिछाया जाल

जब पंचायत लेवल पर मामला नहीं सुलझ पाया तो शिकायत करने वाले ने बिहार निगरानी विभाग से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने शुरुआती जांच की। रिश्वत मांगने की बात कन्फर्म होने पर टीम ने गांव के मुखिया को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।

 

योजना के तहत शिकायतकर्ता को तय समय और स्थान पर आरोपी को पैसे देने के लिए कहा गया। बुधवार को जैसे ही शिकायतकर्ता ने कोर्ट परिसर के बाहर मुखिया को 16 हजार रुपये दिए, पहले से घात लगाए निगरानी अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।

 

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गिरफ्तारी के बाद पूछताछ जारी

गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग की टीम आरोपी मुखिया को अपने साथ लेकर चली गई। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है और पूरे मामले की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

इस घटना के बाद पंचायत क्षेत्र में भी चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी बेहद जरूरी है, ताकि लाभार्थियों को समय पर उनका हक मिल सके। वहीं निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।