पिछले पांच साल में तीन बार गिरफ्तार हो चुके एक शख्स पर अब नया आरोप है कि उसने चुनाव में खूब पैसे खर्च किए और अपनी पत्नी को सरपंच का चुनाव जिता लिया। तेलंगाना के मेडक जिले का यह शख्स पीएचडी डिग्री हासिल कर चुका है और ड्रग्स बनाने के चलते लंबे समय से पुलिस के निशाने पर रहा है। कोर्ट के आदेश पर एक बार उसकी 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति भी जब्त हुई थी। अब पैसे के दम पर चुनाव जिता लेने वाले इस शख्स के कारनामों से तमाम विभाग हैरान रह गए हैं।
इस बार जांच एजेंसियों की नजर उस पर ग्राम पंचायत चुनाव में कथित तौर पर पैसा खर्च करके अपनी पत्नी को सरपंच बनवाने के आरोपों को लेकर है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने चुनाव प्रचार के दौरान बड़े पैमाने पर खर्च कर गांव में माहौल अपने पक्ष में करने की कोशिश की।
आरोपी पीएचडी मेडक जिले का ही रहने वाला है। उसके पास ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में PhD है और उस पर सिंथेटिक ड्रग अल्प्राजोलम बनाने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, उसे 2021 से अब तक तीन बार गिरफ्तार किया जा चुका है। पिछले साल करीब छह महीने जेल में रहने के बाद उसे अक्टूबर 2025 में जमानत पर रिहा किया गया था।
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जांच अधिकारियों के अनुसार, सरपंच चुनाव के दौरान गांव में लगभग दो हफ्तों तक लोगों के लिए खाने-पीने और शराब की व्यवस्था की गई थी। एजेंसियों को शक है कि इसी खर्च के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी भले ही खुद चुनाव नहीं लड़ रहा था लेकिन अपनी पत्नी की जीत सुनिश्चित करने के लिए वह पूरे अभियान में सक्रिय रूप से शामिल रहा।
संपत्ति पहले ही हो चुकी है जब्त
इससे पहले एंटी-ड्रग एजेंसी एलीट एक्शन ग्रुप फॉर ड्रग लॉ एनफोर्समेंट (EAGLE) ने आरोपी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने अदालत की अनुमति से उसकी करीब 30 करोड़ रुपये की 17 संपत्तियां जब्त की थीं। यह कार्रवाई सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क के खिलाफ अभियान के तहत की गई थी। अब जांच एजेंसियों को हैरानी इस बात की है कि इतनी बड़ी आर्थिक कार्रवाई के बावजूद चुनाव में भारी खर्च कैसे किया गया। अधिकारियों को शक है कि आरोपी ने बेनामी लोगों के जरिए धन इकट्ठा किया होगा।
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आरोपी ड्रग्स का इस्तेमाल कहां करता था?
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी द्वारा तैयार की गई अल्प्राजोलम को इलाके के कई ताड़ी बेचने वालों तक पहुंचाया जाता था। आरोप है कि वहां ताड़ी में इस नशीली दवा को मिलाकर ग्राहकों को बेचा जाता था। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में आरोपी के एक रिश्तेदार की भी भूमिका थी जो पुलिस विभाग में कांस्टेबल बताया जाता है।
ड्रग बाजार में एक किलो अल्प्राजोलम की कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई जाती है। वहीं सिर्फ एक ग्राम दवा से करीब 2000 बोतल ताड़ी में नशा मिलाया जा सकता है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि आरोपी अलग-अलग कंपनियों के परिसरों का इस्तेमाल कर ड्रग तैयार करता था। जिनमें विजयवाड़ा और चेरलापल्ली जैसे इलाके शामिल हैं।
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पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ दर्ज चार मामलों में से एक में इस शख्स पर करीब 80 किलो अल्प्राजोलम बनाने का आरोप है। फिलहाल एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि चुनाव में खर्च किया गया पैसा कहां से आया और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।