मेघालय का गारो हिल्स इलाका इस समय गंभीर अशांति के दौर से गुजर रहा है। गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (GHADC) के चुनावों में गैर-आदिवासियों की भागीदारी को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस फायरिंग में दो लोगों की जान चली गई। इसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया है। बिगड़ते हालात को काबू में करने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं।
पश्चिमी गारो हिल्स सहित 5 जिलों में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया है और 13 मार्च तक कर्फ्यू लगा दिया गया है। सुरक्षा के लिहाज से सेना की पांच टुकड़ियों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है, जबकि मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने खतरे के बावजूद अपना घर छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है।
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इलाके में हो क्या रहा है?
प्रशासन की मदद के लिए सेना की 5 टुकड़ियां बुलाई गई हैं। तुरा और चबिनंग जैसे इलाकों में खास चौकसी बरती जा रही है, जहां हिंसा अधिक हुई थी। साथ ही रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी तैनात किया गया है।
अफवाहों को रोकने के लिए गारो हिल्स के पांचों जिलों में इंटरनेट सेवा बंद है। कर्फ्यू की अवधि को 13 मार्च की रात 12 बजे तक के लिए बढ़ा दिया गया है।
इस तनाव का असर बच्चों और राजनीति पर भी पड़ा है। 11 और 12 मार्च को होने वाली 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं फिलहाल टाल दी गई हैं। वहीं, 10 अप्रैल को होने वाले जिला परिषद के चुनावों को भी कानून-व्यवस्था सुधरने तक रोक दिया गया है।
सीएम कोनराड संगमा ने शांति की अपील की है। सुरक्षा घेरे के बावजूद उन्होंने कहा कि वह डरकर कहीं नहीं जाएंगे और अपने घर पर ही रहकर स्थिति की निगरानी करेंगे।
विवाद की असल वजह क्या है?
इस पूरे बवाल की जड़ GHADC के चुनाव हैं। प्रदर्शनकारी संगठनों की मांग है कि इन चुनावों में गैर-आदिवासी समुदाय के लोगों को न तो वोट देने का हक मिलना चाहिए और न ही चुनाव लड़ने का।
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यह विवाद तब और गहरा गया जब एक पूर्व विधायक नामांकन भरने पहुंचे और उनके साथ मारपीट हुई। इसी बीच, मेघालय हाईकोर्ट ने परिषद के उस नियम को भी रद्द कर दिया जिसमें नामांकन के लिए 'एसटी सर्टिफिकेट' अनिवार्य किया गया था। कोर्ट का कहना था कि यह नियम कानूनी प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर बनाया गया है। इसी कानूनी और सामाजिक खींचतान ने इलाके में हिंसा का रूप ले लिया।
